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HP EXAMS PYQ SERIES   5000 Questions   Part - 1 HPPSC ADO PAPER 1 (1) @Examvivechna Join our free Whatsapp,Telegram channel 1.  'कुलिंदों' अथवा 'कुनिंदों' के प्रशासन का क्या स्वरूप था ?  What form of administration the Kunindas or Kulindas had ? (A) संघीय (B) लोकतांत्रिक (C) राजतांत्रिक (D) दैवीय नियमानुसार -(A) संघीय  कुलिंद या कुनिंद शासन का स्वरूप एक राजतांत्रिक व्यवस्था थी, जहाँ सत्ता राजा के हाथों में केंद्रित होती थी। उनका शासन वंशानुगत होता था और राजा अपने राज्य के विभिन्न कार्यों को अपने अधीन अधिकारियों के माध्यम से संचालित करते थे।  स्पष्टीकरण: राजतंत्र: कुलिंदों के संदर्भ में उपलब्ध पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि उनके राज्य में राजा का शासन था और सत्ता वंशानुगत थी। शासक अपने राज्य की विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से प्रशासन चलाते थे, लेकिन अंतिम शक्ति राजा के पास ही होती थी।  संघीय: संघीय शासन में शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच होता है, जो कि कुलिंदों के प्रशासन में नहीं था।  लोकतांत्रिक: लोकतांत्रिक...
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TARGT HP LT TET | LT COMMISSION 100 अतिमहत्वपूर्ण   कवि विशेष पार्ट-1 हिंदी साहित्य : फास्ट रिवीजन क्लास M.A HINDI ENTRANCE | HP LT TET | LT COMMISSION |TGT PGT HINDI |  NET SET JRF HINDI | A.P HINDI @Examvivechna Like, share & Subscribe our YouTube channel Join our free Telegram channel     आज के कवि विशेष 1. सिद्ध कवि सरहपा  सिद्ध कवि सरहपा (जिन्हें सरहपाद, सरह, सरोज आदि नामों से भी जाना जाता है) बौद्ध सिद्ध परंपरा (सहजयान/वज्रयान) के सर्वप्रथम और अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। वे महासिद्धों में अग्रगण्य हैं और सिद्ध साहित्य की परंपरा के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनके जीवन और काव्य के बारे में जो जानकारी उपलब्ध है, वह इस प्रकार है— 1. जीवन-परिचय सरहपा का जीवनकाल  आठवीं–नवीं शताब्दी  के आसपास माना जाता है।  इनका वास्तविक नाम  राहुलभद्र  माना जाता है, किंतु "सरह" (संस्कृत साररह) का अर्थ है – "सत्य के बाण का साधक"।  प्रारंभ में ये  नालंदा विश्वविद्यालय  के पण्डित और विद्वान थे।  बाद में इन्हें सांसारिक ...
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TARGT HP LT TET | Commission 2025 10,000 अतिमहत्वपूर्ण प्रश्न  पार्ट-10                                                                      आज के प्रश्न  हिंदी साहित्य : फास्ट रिवीजन क्लास M.A HINDI ENTRANCE | HP LT TET | LT COMMISSION |TGT PGT HINDI | NET SET JRF HINDI | A.P HINDI @Examvivechna Like, share & Subscribe our YouTube channel Join our free Telegram channel  🔴 1. आचार्य शुक्ल ने रीतिकाल की समय सीमा कब से कब तक मानी है? ✅ 1700-1900 🔴 2. रीतिकाल को श्रृगांर काल का नाम किसने दिया है? ✅  रीतिकाल को 'श्रृंगार काल' नाम  आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र  ने दिया है.  उन्होंने यह नाम इसलिए दिया, क्योंकि इस काल की अधिकांश रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता थी, और इस काल की स्वच्छंदतावादी धारा के कवियों की रचनाएँ भी इसमें शामिल हो सकें.  🔴 3. आचार्य शुक्ल ने रीतिकाल के ...
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TARGT HP LT TET | Commission 2025 10,000 अतिमहत्वपूर्ण प्रश्न  पार्ट-10                                                       आज के पूर्ण व्याख्यात्मक प्रश्न  हिंदी साहित्य : फास्ट रिवीजन क्लास M.A HINDI ENTRANCE | HP LT TET | LT COMMISSION |TGT PGT HINDI | NET SET JRF HINDI | A.P HINDI @Examvivechna Like, share & Subscribe our YouTube channel Join our free Telegram channel PAID WHA. BATCH  🔴 1. आचार्य शुक्ल ने रीतिकाल की समय सीमा कब से कब तक मानी है? ✅ आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रीतिकाल की समय सीमा संवत् 1700 से 1900 तक मानी है. उन्होंने इस काल को 'रीतिकाल' नाम दिया क्योंकि इसकी प्रधान प्रवृत्ति कवि कर्म की विधि और काव्यांग निरूपण थी.  मुख्य बिंदु:  नाम: रीतिकाल प्रवर्तक: चिंतामणि को माना है. अर्थ: 'रीति' का अर्थ प्रणाली, पद्धति, या काव्यांग निरुपण है. 🔴 2. रीतिकाल को श्रृगांर काल का नाम किसने दिया है? ✅ रीतिकाल को श्रृंगार ...