TARGT HP LT TET | Commission 2025
10,000 अतिमहत्वपूर्ण प्रश्न
पार्ट-10
हिंदी साहित्य : फास्ट रिवीजन क्लास
M.A HINDI ENTRANCE | HP LT TET | LT COMMISSION |TGT PGT HINDI | NET SET JRF HINDI | A.P HINDI
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🔴 1. आचार्य शुक्ल ने रीतिकाल की समय सीमा कब से कब तक मानी है?
✅ 1700-1900
🔴 2. रीतिकाल को श्रृगांर काल का नाम किसने दिया है?
✅ रीतिकाल को 'श्रृंगार काल' नाम आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने दिया है. उन्होंने यह नाम इसलिए दिया, क्योंकि इस काल की अधिकांश रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता थी, और इस काल की स्वच्छंदतावादी धारा के कवियों की रचनाएँ भी इसमें शामिल हो सकें.
🔴 3. आचार्य शुक्ल ने रीतिकाल के प्रवर्तक किसे माना है?
✅ चिंतामणि
🔴 4. रीतिकाल की प्रमुख विशेषता क्या है?
✅ रीतिकाल की प्रमुख विशेषताएँ श्रृंगार रस की प्रधानता, अलंकारों का प्रयोग, नायिका भेद का विस्तृत वर्णन, दरबारी संस्कृति का प्रभाव, और ब्रज भाषा में रचनाएँ करना हैं, जिसमें कविगण शास्त्रीय नियमों का पालन करते हुए लक्षण-ग्रंथ लिखते थे।
🔴 5. रीतिकाल के पतन का प्रमुख कारण क्या है?
✅ सामाजिक-राजनीतिक विघटन
🔴 6. बिहारी सतसई की प्रसिद्धि का प्रमुख कारण क्या था?
✅ बिहारी सतसई की प्रसिद्धि का प्रमुख कारण इसका संक्षिप्त, मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण मुक्तक काव्य रूप था, जिसमें शृंगार रस का गहन अनुभव और शब्द-शिल्प की अद्भुत कुशलता थी। प्रत्येक दोहा अपने आप में पूर्ण और गंभीर अर्थ रखता था, जैसे 'सतसैया के दोहरे ज्यों नावक के तीर'।
🔴 7. रीतिकाल मे रीति परम्परा के अंतिम प्रसिद्ध कवि कौन माने जाते है?
✅ रीतिकाल में रीति परम्परा के अंतिम प्रसिद्ध कवि के रूप में ग्वाल कवि को माना जाता है, जिन्होंने 19वीं शताब्दी में रीतिकाल के रीतिग्रंथकार कवि के रूप में अपनी पहचान बनाई.
🔴 8. केशवदास की विज्ञानगीता मे किस शैली का प्रयोग हुआ है?
✅ केशवदास की 'विज्ञानगीता' में मुख्य रूप से संस्कृतनिष्ठ ब्रजभाषा और प्रबोधचन्द्रोदयशैली का प्रयोग हुआ है, जिसके कारण इसकी भाषा अत्यधिक दुरूह हो जाती है। इसमें वर्णकृत्त छन्दों का प्रयोग किया गया है और प्रमाण के लिए संस्कृत के उद्धरण दिए गए हैं।
🔴 9. कवि पद्माकर को कौनसी पदवी प्राप्त थी?
✅ कवि पद्माकर को जयपुर नरेश 'महाराजा प्रतापसिंह' द्वारा 'कविराज शिरोमणि' की पदवी प्राप्त हुई थी। यह उपाधि उन्हें जयपुर में प्राप्त हुई थी और इसके साथ ही उन्हें अच्छी जागीर भी मिली थी।
🔴 10. पद्माकर के 'पद्माभरण ' व 'जगद विनोद' किस निरूपण से सम्बन्धित है?
✅ पद्माकर के 'पद्माभरण' और 'जगद विनोद' ग्रंथ श्रृंगार रस के निरूपण से संबंधित हैं। 'पद्माभरण' मुख्य रूप से अलंकार निरूपण का ग्रंथ है, जबकि 'जगद विनोद' का मुख्य विषय श्रृंगार रस है, जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है।
🔴 11. आचार्य शुक्ल ने घनानन्द को किसका कवि कहा है?
✅ आचार्य शुक्ल के अनुसार, घनानंद रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं, जिन्हें वे 'साक्षात् रसमूर्ति' भी कहते हैं। शुक्ल जी के अनुसार घनानंद की भाषा अत्यंत विशुद्ध, सजीव, शक्तिशालिनी और लाक्षणिक है, जो ब्रजभाषा के उच्च आदर्श को प्रस्तुत करती है, और वे प्रेम के अद्वितीय पथिक थे।
🔴 12. देव की 'अष्टयाम' रचना मे किसका वर्णन किया गया है?
✅ देव की रचना 'अष्टयाम' में रात-दिन के भोग-विलास और नायक-नायिका की दैनिक चर्या का वर्णन किया गया है। यह एक वर्णनात्मक प्रबंध काव्य है जो किसी कथा-प्रबंध के स्थान पर चरित्र-चित्रण के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
🔴 13. हिन्दी की सतसई - परम्परा मे प्रथम ग्रन्थ कौनसा माना जाता है?
✅ हिन्दी की सतसई परम्परा का प्रथम ग्रन्थ कृपाराम द्वारा रचित हिततरंगिणी को माना जाता है, जिसका रचनाकाल 1541 ईस्वी है. हालाँकि सतसई परंपरा की शुरुआत प्राकृत कवि हाल की 'गाथासप्तशती' और संस्कृत कवि गोवर्धन की 'आर्यासप्तशती' से हुई थी, लेकिन हिंदी की सतसई परम्परा में हिततरंगिणी को पहला ग्रन्थ माना जाता है.
🔴 14. हिन्दी के सर्वप्रथम लक्षण ग्रन्थकार किसे माना गया है?
✅ हिन्दी के सर्वप्रथम लक्षण ग्रंथकार के रूप में केशवदास को माना जाता है, जिन्होंने रीतिकाल में 'रामचंद्रिका' और 'कविप्रिया' जैसे महत्त्वपूर्ण लक्षणों पर आधारित ग्रंथ लिखे।
🔴 15. रीतिकाल का प्रमुख विषय व काव्यरूप क्या माना गया है?
✅ रीतिकाल का प्रमुख विषय शृंगार और वीरता रहा है, जबकि उसका प्रमुख काव्यरूप मुक्तक काव्य और लक्षण ग्रंथ माने गए हैं। इस काल के कवि दरबारी परिवेश में रहते थे, जहाँ विलासिता और कलात्मकता का माहौल था, इसलिए उन्होंने प्रेम और सौंदर्य का वर्णन किया और काव्यशास्त्र के नियमों पर आधारित रचनाएँ कीं।
🔴 16. रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, व रीतिमुक्त धाराओं को सर्वप्रथम किसने विभाजित किया?
✅ रीतिकाल की रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, और रीतिमुक्त धाराओं को सर्वप्रथम आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने विभाजित किया था, जिन्होंने रीतिकाल को श्रृंगारकाल नाम दिया और उसे इन तीन वर्गों में बांटा।
🔴 17. रीतिकालीन काव्य की सर्वप्रमुख भाषा कौनसी है?
✅ रीतिकालीन काव्य की सर्वप्रमुख भाषा ब्रजभाषा थी। रीतिकाल के कवियों ने अपनी रचनाओं के लिए ब्रजभाषा का प्रयोग किया और इसे साहित्यिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया।
🔴 18. रीतिकाल की सर्वाधिक व्यापक प्रवृत्ति क्या है?
✅ रीतिकाल की प्रमुख प्रवृवि रीति तनरूपण या लक्षण-ग्रंथों का तनमाशण है। इन कववयों ने संतकृि के आचायों का अनुकरण पर लक्षण-ग्रंथों अथवा रीति ग्रंथों का तनमाशण ककया है।
🔴 19. केशव की रामचन्द्रिका को छन्दो का अजायबघर किसने कहा है?
✅ केशव की 'रामचन्द्रिका' को 'छन्दों का अजायबघर' डॉ. राम स्वरूप चतुर्वेदी ने कहा है। यह उपाधि 'रामचन्द्रिका' में प्रयोग किए गए अनेकों छंदों की विविधता और प्रचूरता के कारण दी गई है, जिसमें प्रचलित और अप्रचलित दोनों प्रकार के छंदों का प्रयोग मिलता है।
🔴 20. केशवदास कृत कविप्रिया का उद्देश्य क्या है?
✅ केशवदास की 'कविप्रिया' का मुख्य उद्देश्य कविजनों के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ बनना और काव्यांगों (अलंकार, रस, नायिका भेद आदि) का विस्तृत विवेचन करना है, साथ ही संस्कृत के लक्षण ग्रंथों का अनुसरण करते हुए उदाहरण स्वरूप अपनी कविताओं की रचना करना भी है। यह ग्रंथ काव्य-कला के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करता है और एक परिपूर्ण कवि के निर्माण में सहायक होता है।
🔴 21. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने केशव को क्या कहा है?
✅ आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने केशवदास को उनकी क्लिष्टता और अलंकारों के प्रति विशेष रुचि के कारण 'कठिन काव्य का प्रेत' कहा है, क्योंकि उनकी रचनाओं में काव्य की लय और हृदय स्पर्शी भावों के बजाय अलौकिक और शास्त्रबद्धता अधिक दिखती है.
🔴 22. कविवर देव की सर्वप्रथम रचना कौनसी है?
✅ कविवर देव की सर्वप्रथम रचना भाव-विलास मानी जाती है. यह एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो उनके काव्य-संसार की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है.
🔴 23. कविवर देव को किस दृष्टि से अधिक सफलता मिली है?
✅ कविवर देव को परिष्कृत सौंदर्य-बोध, मौलिक उद्भावना शक्ति और 'कवित्व-प्रधान' होने के कारण सबसे अधिक सफलता मिली है, जिससे उनका काव्य रीतिकाल के कवियों में समृद्ध सिद्ध होता है।
🔴 24. रीतिकालीन कवियों मे बिहारी की तुलना किस से की गई है?
✅ रीतिकाल में बिहारी की तुलना अक्सर देव और अन्य रीतिकाल के कवियों के साथ की जाती है, विशेष रूप से "बिहारी-देव विवाद" के दौरान, जिसने हिन्दी साहित्य की तुलनात्मक आलोचना को गति प्रदान की। बिहारी की विशिष्टता, उनकी कलात्मकता, संक्षिप्तता, और अलंकारपूर्ण भाषा के कारण उन्हें रीतिकाल का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ कवि माना जाता है।
🔴 25. हिन्दी मे नायिका भेद की प्रौढ़तम रचना करने वाले आचार्य कवियों मे सर्वोपरि कौन है?
✅ देव
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