HP EXAMS PYQ SERIES 

5000 Questions 

Part - 1

HPPSC ADO PAPER 1 (1)

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1.  'कुलिंदों' अथवा 'कुनिंदों' के प्रशासन का क्या स्वरूप था ? What form of administration the Kunindas or Kulindas had ?

(A) संघीय

(B) लोकतांत्रिक

(C) राजतांत्रिक

(D) दैवीय नियमानुसार


-(A) संघीय 

कुलिंद या कुनिंद शासन का स्वरूप एक राजतांत्रिक व्यवस्था थी, जहाँ सत्ता राजा के हाथों में केंद्रित होती थी। उनका शासन वंशानुगत होता था और राजा अपने राज्य के विभिन्न कार्यों को अपने अधीन अधिकारियों के माध्यम से संचालित करते थे। 

स्पष्टीकरण:

राजतंत्र: कुलिंदों के संदर्भ में उपलब्ध पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि उनके राज्य में राजा का शासन था और सत्ता वंशानुगत थी। शासक अपने राज्य की विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से प्रशासन चलाते थे, लेकिन अंतिम शक्ति राजा के पास ही होती थी। 

संघीय: संघीय शासन में शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच होता है, जो कि कुलिंदों के प्रशासन में नहीं था। 

लोकतांत्रिक: लोकतांत्रिक शासन में जनता का शासन होता है, जबकि कुलिंदों की व्यवस्था में राजा का शासन था। 

दैवीय नियमानुसार: यद्यपि प्राचीन काल में शासकों को अक्सर दैवीय अधिकार प्राप्त होते थे, फिर भी यह उनके प्रशासन के मुख्य स्वरूप का वर्णन नहीं करता है। राजा का शासन ही उनका मुख्य स्वरूप था।


2. काँगड़ा के 'पठियार' और 'कनिहारा' के प्राचीन शिलालेख किस लिपि में है ? What is the script of ancient rock inscription of Pathiar and Kanihara, Kangra ?

(A) ब्राह्मी और खरोष्ठी

(B) खरोष्ठी और टाँकरी

(C) ब्राह्मी और शारदा

(D) शारदा और नागरी


-(A) ब्राह्मी और खरोष्ठी 

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में पथियार और कनिहारा में प्राचीन शिलालेखों की लिपि ब्राह्मी और खरोष्ठीहै । पठियार शिलालेख दोनों लिपियों में द्विभाषी पाठ है, जो बाएं से दाएं ब्राह्मी में और फिर दाएं से बाएं खरोष्ठी में लिखा गया है। 

शिलालेखों का विवरण

स्क्रिप्ट: ये शिलालेख ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों में लिखे गए हैं, जो प्राचीन भारत में प्रचलित थीं। 

भाषा और विषय-वस्तु: पठियार शिलालेख प्राकृत भाषा में है, जो ब्राह्मी से काफी मिलती जुलती भाषा है। इसमें व्याल नामक एक व्यक्ति और एक तालाब (पाकरिणी) का उल्लेख है। 

द्विभाषी प्रकृति: ब्राह्मी पाठ के बाद खरोष्ठी में एक दोहराई गई पंक्ति है, जिसमें एक अतिरिक्त शब्द शामिल है। 

ऐतिहासिक संदर्भ: ये शिलालेख प्रारंभिक शताब्दियों के हैं, तथा कुछ विद्वान इन्हें पहली शताब्दी ईसा पूर्व का मानते हैं। वे प्राचीन भारत में तालाबों वाले उद्यान क्षेत्रों के अस्तित्व की पुष्टि करते हैं तथा मौर्य काल और बाद की शताब्दियों से जुड़े हुए हैं। 

खरोष्ठी लिपि: खरोष्ठी लिपि का प्रयोग मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भागों में किया जाता था, जबकि ब्राह्मी अधिक व्यापक थी। 

खरोष्ठी दिशा: खरोष्ठी लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती है, जो इसके साथ प्रयुक्त ब्राह्मी लिपि से एक उल्लेखनीय अंतर है। 

3. प्रसिद्ध भाषाविद् ग्रियर्सन के अनुसार हिमालय क्षेत्र के प्रथम परिचित इंडो-आर्यन कौन थे ? According to the famous linguist Grierson, who were the first familiar Indo-Aryans of Himalayan territory?

(A) खश

(B) किरात

(C) नाग

(D) दास


- (A) खश

हिमाचल प्रदेश सामान्य अध्ययन के एक लेख से प्राप्त जानकारीके अनुसार , प्रसिद्ध भाषाशास्त्री जॉर्ज ग्रियर्सन ने खासों को हिमालय क्षेत्र का सबसे पुराना ज्ञात इंडो-आर्यन माना था। 

जबकि ग्रियर्सन का कार्य भाषाई सर्वेक्षणों और वर्गीकरणों पर केंद्रित था, हिमालय के विशिष्ट "प्रथम" इंडो-आर्यों के बारे में जानकारी अक्सर व्यापक ऐतिहासिक और भाषाई अध्ययन का विषय होती है। हालाँकि, उस क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषाओं के संदर्भ में, हिमाचल प्रदेश के लिए किए गए एक अध्ययन में पूछे गए प्रश्न में ग्रियर्सन और हिमालयी क्षेत्र के प्रारंभिक भारतीय-आर्यों के संबंध में खासों की विशेष रूप से पहचान की गई है। 

4. चम्बा के राजाओं का संबंध राजपूतों के किस वंश से जोड़ा जाता है ? The Rajas of Chamba belong to which line of the Rajputs?

(A) चंद्रवंशी

(B) अग्निवंशी

(C) नागवंशी

(D) सूर्यवंशी


-(D) सूर्यवंशी 

चम्बा के राजा सूर्यवंशी राजपूत वंश से संबंधित हैं। इसका संकेत भारत के राजपूत प्रांतजैसे स्रोतों से मिलता है, जो बताता है कि शासक वंश सूरजबंसी राजपूत वंश से संबंधित है, और ट्रैवलर ट्रेल्स चम्बा को सूर्यवंशी शासकों का राज्य कहता है। 

यहां विकल्पों का विवरण दिया गया है:

(ए) चंद्रवंशी: यह वंश चंद्र देवता, चंद्र से वंश का दावा करता है। 

(बी) अग्निवंशी: यह वंश अग्नि से उत्पन्न वंश का दावा करता है, जिसके उदाहरण चौहान, प्रतिहार, परमार और सोलंकी हैं। 

(सी) नागवंशी: यह वंश तीन मुख्य वंशों (सूर्यवंशी, चंद्रवंशी, अग्निवंशी) में से एक के रूप में सूचीबद्ध नहीं है और इसलिए गलत है। 

(डी) सूर्यवंशी: यह वंश सूर्यदेवता से अपनी वंशावली का दावा करता है। 

इसलिए, सूर्यवंशी सही उत्तर है क्योंकि चम्बा शासकों का वंश सूर्यवंशी (या सूरजबंसी) राजपूत वंश से जुड़ा है। 


5. भीतरी हिमालय श्रृंखला अथवा जंस्कार पर्वत श्रृंखला निम्न में से किन जिलों को विभक्त है? Which of the following districts are separated by the Inner Himalayas/Za range ?

(A) चम्बा और लाहौल-स्पिति

(B) कुल्लू और कांगड़ा

(C) चम्बा और कांगड़ा

(ID) चम्बा और कुल्लू


-(A) चम्बा और लाहौल-स्पिति 

ज़ांस्कर (या ज़ा) पर्वतमाला लद्दाख और ज़ांस्कर जिलों को अलग करती है। विशेष रूप से, ज़ांस्कर पर्वतमाला सिंधु घाटी को ज़ांस्कर घाटी से अलग करती है।

इसके अतिरिक्त, आंतरिक हिमालय (जिसमें ज़ांस्कर पर्वतमाला भी शामिल है) व्यापक पश्चिमी हिमालय के भीतर अन्य जिलों और क्षेत्रों को अलग करती है।

इस पर्वतीय क्षेत्र द्वारा अलग किए गए प्रमुख जिलों में शामिल हैं:

लद्दाख और ज़ांस्कर: लद्दाख के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में स्थित ज़ांस्कर पर्वतमाला, उत्तर में सिंधु घाटी को दक्षिण में ज़ांस्कर घाटी से अलग करती है।

जम्मू और कश्मीर: आंतरिक हिमालय का हिस्सा पीर पंजाल पर्वतमाला, कश्मीर घाटी को दक्षिण में स्थित जम्मू क्षेत्र से अलग करती है।

हिमाचल प्रदेश: आंतरिक हिमालय पर्वतमाला हिमाचल प्रदेश से भी होकर गुजरती है। उदाहरण के लिए, धौलाधार पर्वतमाला चंबा जिले की दक्षिणी सीमा बनाती है और इसे कांगड़ा जिले से अलग करती है।


6. निम्न में से किस मंदिर का निर्माण कश्मीर साम्राज्य के राजा अजय वर्मा ने किया था Which of the following temples was built by the Raja Ajay Verma of K: dynasty?

(A) मृकुला देवी, उदयपुर

(B) बाला सुंदरी, त्रिलोकपुर

(C) हाटेश्वरी मंदिर, हाटकोटी

(D) भद्रकाली मंदिर, भलेई


- (A) मृकुला देवी, उदयपुर

ऐसा लगता है कि आपके प्रश्न में उत्तर विकल्प और राजवंश का नाम गायब है। ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर राजा अजय वर्मा द्वारा निर्मित मंदिर संभवतः उदयपुर स्थित मृकुला देवी मंदिर है।

राजा अजय वर्मा को कला और वास्तुकला के संरक्षण के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से उदयपुर क्षेत्र में। मृकुला देवी मंदिर, जो देवी मृकुला को समर्पित है, उदयपुर का एक प्रमुख स्थल है और अक्सर उनके शासनकाल से जुड़ा हुआ है।

यद्यपि बाला सुंदरी, हाटेश्वरी और भद्रकाली जैसे अन्य मंदिर मौजूद हैं, लेकिन यह निश्चित रूप से कहने के लिए कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है कि उनका निर्माण राजा अजय वर्मा ने कराया था। निर्णायक उत्तर के लिए राजवंश (K:) के बारे में अधिक जानकारी की आवश्यकता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नों के सबसे सटीक उत्तरों के लिए, अपनी खोज में उत्तर विकल्प और कोई भी प्रासंगिक कीवर्ड शामिल करने का प्रयास करें।


7. निम्न में से कौनसा दर्श लाहौल से स्पिति के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार (उपमार्ग) प्रदान करता है ? Which of the following passes provide the main approach to Spiti from Lahaul?

(A) साच दर्रा

(B) कुंजम दर्रा

(C) रोहतांग दर्श

(D) बारालाचा दर्रा


-(B) कुंजम दर्रा

 लाहौल से स्पीति के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार (B) कुंजम दर्रा है। यह दर्रा लाहौल क्षेत्र को विशाल कुंजुम श्रेणी द्वारा अलग की गई स्पीति क्षेत्र से जोड़ता है और पूरे वर्ष खुला रहता है, जो इसे इन दोनों घाटियों के बीच मुख्य पहुँच प्रदान करता है। 

(A) साच दर्रा: यह दर्रा चंबा जिले में स्थित है और इसका लाहौल या स्पीति से सीधा संबंध नहीं है।

(B) कुंजम दर्रा: यह दर्रा लाहौल को स्पीति से जोड़ने वाला मुख्य प्रवेश द्वार है, जिसकी ऊँचाई समुद्र तल से 4,590 मीटर है और यह स्पीति नदी का भी उद्गम स्थल है। 

(C) रोहतांग दर्रा: यह दर्रा कुल्लू घाटी को लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है, लेकिन यह सीधे लाहौल से स्पीति नहीं जाता, बल्कि स्पीति की ओर जाने वाले रास्ते के आरंभ में है। 

(D) बारालाचा दर्रा: यह दर्रा लाहौल और लद्दाख (लेह) को जोड़ता है, और यह मनाली-लेह मार्ग पर स्थित है। 


8. सन् 1914 में निम्न में से हिमाचल प्रदेश के किस जिले/क्षेत्र में गदर पार्टी की गतिविधियों में वृद्धि हुई थी ? During 1914 the activities of Gadar Party was increased in which district/area of Himachal Pradesh ?

(A) बिलासपुर और नालागढ़

(B) बिलासपुर और शिमला

(C) मण्डी और सुकेत

(D) कांगड़ा और कुल्लू


- (C) मण्डी और सुकेत

1914-1915 के दौरान, गदर पार्टी की गतिविधियाँ वर्तमान हिमाचल प्रदेश के भीतर मंडी और सुकेत राज्योंमें बढ़ गईं, जहाँ पार्टी के सदस्यों ने विद्रोह को भड़काने का लक्ष्य रखा और मंडी षड्यंत्रके रूप में जाना जाने वाला एक षड्यंत्र किया । 

मंडी और सुकेत में गतिविधियाँ:

भर्ती: गदर पार्टी के सदस्य अमेरिका से इन राज्यों में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं, जैसे मियां जवाहर और मंडी की रानी खैरगढ़ी, की भर्ती करने के लिए आये। 

विद्रोह की योजना बनाना: दिसंबर 1914 और जनवरी 1915 में मण्डी और सुकेत के अधीक्षक और वजीर की हत्या, खजाना लूटने और ब्यास पुल को उड़ाने की योजना बनाने के लिए बैठकें आयोजित की गईं। 

मंडी षड्यंत्र: इस सुनियोजित विद्रोह को मंडी षड्यंत्र के नाम से जाना गया और यह गदर पार्टी के प्रभाव में किया गया था। 

आंदोलन के परिणाम: 

इस आंदोलन को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर दबा दिया गया।

परिणामस्वरूप मण्डी की रानी खैरगढ़ी को निर्वासित कर दिया गया।

यद्यपि षडयंत्र का मुख्य लक्ष्य विफल हो गया, फिर भी नागचला डकैती के नाम से प्रसिद्ध एक सफल डकैती को अंजाम दिया गया।

9. 15 अगस्त, 1957 में बने हिमाचल प्रदेश प्रादेशिक परिषद के मुखिया/अध्यक्ष कौन थे ? Who headed the territorial council of Himachal Pradesh which was formed on 15th August 1957?

(A) यशवंत सिंह परमार

(B) राजा बजरंग बहादुर सिंह

(C) मेजर जनरल हिम्मत सिंह

(D) ठाकुर करम सिंह


- (D) ठाकुर करम सिंह

मंडी के ठाकुर करम सिंह 1957 में गठित हिमाचल प्रदेश प्रादेशिक परिषद के अध्यक्ष चुने गए, जिसे बाद में 1963 में विधान सभा में परिवर्तित कर दिया गया। 

विवरण 

हिमाचल प्रदेश प्रादेशिक परिषद का गठन 15 अगस्त, 1957 को हुआ था।

ठाकुर करम सिंह को इस परिषद का अध्यक्ष चुना गया।

1963 में संघ राज्य क्षेत्र अधिनियमके तहत प्रादेशिक परिषद को विधान सभा में परिवर्तित कर दिया गया।


10. सन् 1951 में हिमाचल प्रदेश में सर्वप्रथम विधान सभा के चुनाव कितने विधान सभा सदस्यों के लिये हुए थे ? Election to how many members first ever Himachal Pradesh Legislative Assembly were held in the year 1951?

(A) चौबीस (24)

(B) छत्तीस (36)

(C) अड़तालीस (148)

(D) साठ (60)


- (B) छत्तीस (36)

- In the 1951 election for the first-ever Himachal Pradesh Legislative Assembly, 36 members were elected. Of these, eight seats were reserved. 


11. निम्नलिखित में से किस पन-विजली परियोजना की परिकल्पना राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए पीने के पानी की आपूर्ति हेतु की गई थी? Which of the following hydroelectric power dam was conceived as a water supply scheme for the national capital Delhi?

(A) शोंग्ठोंग-करछम जल विद्युत परियोजना

(B) कोलडैम जल-विद्युत परियोजना

(C) रेणुका डैम जल-विदयुत परियोजना

(D) गिरि-वाटा जल-विदयुत परियोजना


- (C) रेणुका डैम जल-विदयुत परियोजना

The Renuka Dam project, located in Himachal Pradesh, was conceived as a water supply scheme to address the water needs of the national capital, Delhi. 

Additional details about the project:

Location and River: The 148-meter-high dam is situated on the Giri River, a tributary of the Yamuna River, in the Sirmour district of Himachal Pradesh.

Water Supply to Delhi: The dam is designed to store monsoon flows from the Giri River, which will then be released into the Yamuna River. This regulated flow is intended to increase the availability of drinking water for Delhi.

Other Dams for Delhi: While the Renuka Dam is a prominent project for Delhi's water supply, the city also sources water from other projects, including the Lakhwar Dam and Kishau Dam, both on tributaries of the Yamuna.

Project History: The Renuka Dam project has a long and complex history, experiencing significant delays due to opposition and financial issues. It was eventually expedited, with an agreement signed in 2019 by basin states and the Ministry of Jal Shakti. 


12. हिमाचल प्रदेश में निम्न में से कौनसा क्षेत्र 'एशिया का आडू का कटोरा' के रूप में प्रसिद्ध है ?Which of the following places in Himachal Pradesh is known as the 'Peach bowl of Asia'?

(A) कण्डाघाट

(B) सोलन

(C) राजगढ़, सिरमौर

(D) बजौरा, कुल्लू


- (C) राजगढ़, सिरमौर

हिमाचल प्रदेश का राजगढ़, सिरमौर क्षेत्र 'एशिया का आडू का कटोरा' के रूप में प्रसिद्ध है, क्योंकि यह सुगंधित और स्वादिष्ट आड़ू के उत्पादन के लिए जाना जाता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय बनाता है।  

एशिया के आडू का कटोरा: राजगढ़ घाटी को 'एशिया का आडू का कटोरा' कहा जाता है। 

उत्पादन: यह क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले, सुगंधित और रसीले आड़ू के उत्पादन के लिए जाना जाता है। 

आर्थिक महत्व: राजगढ़ का आड़ू अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध है और अच्छी आय उत्पन्न करता है। 

विकास: हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री, डॉ. वाईएस परमार ने इस क्षेत्र में आड़ू के बगीचों के विकास को बढ़ावा दिया। 

किस्में: इस क्षेत्र में नई और पुरानी दोनों तरह की आड़ू की किस्में उगाई जाती हैं। 

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