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Showing posts from February, 2026

हिन्दी का भाषिक स्वरूप

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1. भाषा की वह लघुतम इकाई जो अर्थ भेदक होती है, क्या कहलाती है? (A) शब्द (B) स्वनिम (C) वाक्य (D) रूपिम उत्तर: (B) व्याख्या: स्वनिम (Phoneme) उच्चारित भाषा की वह सबसे छोटी इकाई है जो अर्थ परिवर्तन करने की क्षमता रखती है। 2. 'खंड्येतर' स्वनिम के अंतर्गत इनमें से कौन सा आता है? (A) स्वर (B) व्यंजन (C) अनुनासिकता (D) संयुक्त अक्षर उत्तर: (C) व्याख्या: स्वर और व्यंजन 'खंड्य' हैं, जबकि अनुनासिकता, सुर और बलाघात 'खंड्येतर' (Suprasegmental) हैं। 3. 'सिरका' और 'सिर का' में अर्थ भेद का कारण क्या है? (A) बलाघात (B) संगम (C) तान (D) विवृत्ति उत्तर: (B) व्याख्या: शब्दों के बीच सूक्ष्म विराम को 'संगम' कहते हैं, जो अर्थ बदल देता है। 4. हिन्दी में मूलतः कितने स्वर स्वनिम माने जाते हैं? (A) 8 (B) 10 (C) 12 (D) 13 उत्तर: (B) व्याख्या: मानक उच्चारण की दृष्टि से हिन्दी में 10 स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) माने जाते हैं। 5. 'हँस' और 'हंस' में किस खंड्येतर स्वनिम का प्रयोग हुआ है? (A) सुर (B) संगम (C) अनुनासिकता (D) मात्रा उत्...

हिन्दी के विविध रूप : हिन्दी, उर्दू, दक्खिनी, हिन्दुस्तानी

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भाग 1: हिन्दी का उद्भव और विकास 1. 'हिन्दी' शब्द किस भाषा का है? (A) संस्कृत (B) फारसी (C) अरबी (D) तुर्की उत्तर: (B) फारसी व्याख्या: 'हिन्दी' शब्द मूल रूप से फारसी का है, जो 'सिंधु' शब्द से विकसित होकर 'हिन्दू' और फिर 'हिन्दी' बना। 2. आधुनिक मानक हिन्दी का आधार क्या है? (A) अवधी (B) ब्रजभाषा (C) खड़ी बोली (D) भोजपुरी उत्तर: (C) खड़ी बोली व्याख्या: आज हम जिस हिन्दी का प्रयोग करते हैं, उसका मूल आधार 'खड़ी बोली' है। 3. हिन्दी भाषा का विकास किस अपभ्रंश से हुआ है? (A) शौरसेनी अपभ्रंश (B) मागधी अपभ्रंश (C) पैशाची अपभ्रंश (D) ब्राचड़ अपभ्रंश उत्तर: (A) शौरसेनी अपभ्रंश व्याख्या: हिन्दी का विकास मुख्य रूप से शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है। 4. संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी भारत की राजभाषा है? (A) अनुच्छेद 343 (B) अनुच्छेद 351 (C) अनुच्छेद 345 (D) अनुच्छेद 348 उत्तर: (A) अनुच्छेद 343 व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत देवनागरी लिपि में लिखी गई हिन्दी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया है। भाग 2: उर्दू और ...

Target HP LT TET || LT Commission आदिकाल की वीरगाथा काव्यधारा

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Target HP LT TET || LT Commission  आदिकाल की वीरगाथा काव्यधारा पर आधारित  परीक्षा-उपयोगी प्रश्न–उत्तर दिए जा रहे हैं। ये प्रश्न HP LT TET / HP TGT / SET / NET सभी के लिए उपयोगी हैं। --- 📘 वीरगाथा काव्यधारा : महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर 🔹 सामान्य परिचय 1. प्रश्न: आदिकाल को किस नाम से जाना जाता है? उत्तर: वीरगाथा काल 2. प्रश्न: वीरगाथा काव्यधारा किस काल से संबंधित है? उत्तर: आदिकाल 3. प्रश्न: वीरगाथा काव्यधारा की समय-सीमा क्या मानी जाती है? उत्तर: लगभग 1000 ई. से 1375 ई. 4. प्रश्न: वीरगाथा काव्य का प्रमुख विषय क्या है? उत्तर: वीरता और शौर्य 5. प्रश्न: वीरगाथा काव्य में किस वर्ग के वीरों का वर्णन है? उत्तर: राजपूत वीरों का 6. प्रश्न: वीरगाथा काव्य में प्रमुख रस कौन-सा है? उत्तर: वीर रस 7. प्रश्न: वीरगाथा काव्य में युद्ध का चित्रण किस रूप में होता है? उत्तर: गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक 8. प्रश्न: वीरगाथा काव्य का उद्देश्य क्या था? उत्तर: वीरता का गुणगान करना 9. प्रश्न: वीरगाथा काव्य में किस भावना की प्रधानता है? उत्तर: स्वाभिमान 10. प्रश्न: वीरगाथा काव्य की भाषा...

Target HP PGT हिंदी आधुनिक काव्य मैथिलीशरण गुप्त - साकेत, नवमसर्ग पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न

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'साकेत' के नवम सर्ग पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं: प्रश्न: 'साकेत' के नवम सर्ग का मुख्य पात्र कौन है? उत्तर: इस सर्ग की मुख्य पात्रा उर्मिला (लक्ष्मण की पत्नी) हैं। पूरा सर्ग उनकी विरह-वेदना पर केंद्रित है। प्रश्न: मैथिलीशरण गुप्त ने साकेत की रचना किस उद्देश्य से की थी? उत्तर: मुख्य रूप से रामायण की उपेक्षित पात्रा उर्मिला के त्याग और विरह को साहित्य में उचित स्थान देने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए। प्रश्न: "दोनों ओर प्रेम पलता है" पंक्ति का क्या अर्थ है? उत्तर: इसका अर्थ है कि सच्चा प्रेम एकतरफा नहीं होता। जैसे पतंगा दीपक पर जलता है, वैसे ही दीपक भी लौ में जलकर अपना अस्तित्व मिटाता है। उर्मिला और लक्ष्मण दोनों ही एक-दूसरे के वियोग में समान रूप से व्यथित हैं। प्रश्न: नवम सर्ग में उर्मिला की विरह अवस्था को दर्शाने के लिए किन ऋतुओं का वर्णन है? उत्तर: गुप्त जी ने षड-ऋतु (छह ऋतुओं) के माध्यम से उर्मिला के विरह का वर्णन किया है, जिसमें वर्षा, शरद और शिशिर ऋतु का विशेष महत्व है। प्रश्न: उर्मिला अपनी विरह वेदना में प्र...

'शेखर : एक जीवनी' (भाग 1) पर आधारितमहत्वपूर्ण प्रश्न :

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'शेखर : एक जीवनी' (भाग 1) पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न : 1. 'शेखर : एक जीवनी' के लेखक कौन हैं? उत्तर: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'। 2. भाग 1 का प्रकाशन वर्ष क्या है? उत्तर: 1941 (कुछ स्रोतों में इसे 1940 भी कहा गया है)। 3. इस उपन्यास की मुख्य विधा क्या है? उत्तर: यह एक 'मनोवैज्ञानिक' और 'आत्मकथात्मक' उपन्यास है। 4. उपन्यास की कथा किस तकनीक में लिखी गई है? उत्तर: फ्लैशबैक या 'पूर्व-दीप्ति' (Flashback) शैली में। 5. शेखर को फांसी की सजा क्यों दी गई थी? उत्तर: क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने के कारण। 6. अज्ञेय ने इस उपन्यास को क्या कहकर संबोधित किया है? उत्तर: 'स्व की खोज' का दस्तावेज। 7. आलोचकों ने इस उपन्यास को क्या संज्ञा दी है? उत्तर: 'प्रकाशमान पुच्छल तारा'। 8. शेखर के बालमन पर किन तीन प्रवृत्तियों का प्रभाव दिखाया गया है? उत्तर: काम (Sex), अहम (Ego) और भय (Fear)। 9. उपन्यास का नायक शेखर किस प्रकार का व्यक्तित्व है? उत्तर: विद्रोही, चिंतनशील और आत्म-विश्लेषी। 10. शशि का शेखर से क्या ...

LT TET 2020

Fast Revision 1. 'स्नेह निर्झर बह गया है' कविता के रचयिता Answer: (D) निराला यह कविता सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा लिखी गई है। इसमें उन्होंने अपने जीवन के अवसाद और अकेलेपन को व्यक्त किया है।  2. 'दिनकर' द्वारा लिखित निबन्ध Answer: (C) नेता नहीं नागरिक चाहिए. यह निबन्ध रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखा गया है। 3. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा सम्पादित Answer: (A) कविवचन सुधा 'कविवचन सुधा' पत्रिका का संपादन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने किया था। 4. 'यशोधरा' कविता के रचनाकार कौन हैं ? Answer: (C) मैथिलीशरण गुप्त 'यशोधरा' महाकाव्य के रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हैं। 5. इनमें से कौन 'कफन' कहानी का पात्र नहीं है? Answer: (B) मधुआ 'कफन' कहानी के मुख्य पात्र घीसू, माधव और बुधिया हैं। मधुआ इस कहानी का पात्र नहीं है।  6. 'उद्देश्य' और 'विधेय' किसके अवयव हैं? Answer: (C) वाक्य 'उद्देश्य' (subject) और 'विधेय' (predicate) वाक्य के दो मुख्य अवयव (parts) होते हैं। 7. (,) चिह्न को क्या कहते हैं? Answer: (...

Pgt hindi mcqs-1

 प्राचीन (आदिकाल) और मध्यकाल (भक्तिकाल एवं रीतिकाल) पर आधारित यह 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) आपकी तैयारी में सहायक होंगे। भाग 1: आदिकाल (प्राचीन काल) 1. हिंदी साहित्य के इतिहास का प्रथम लेखक कौन है? (A) रामचंद्र शुक्ल (B) गार्सा-द-तासी (C) शिवसिंह सेंगर (D) जार्ज ग्रियर्सन उत्तर: (B). व्याख्या: फ्रांसीसी विद्वान गार्सा-द-तासी ने 'इस्त्वार द ला लितरेत्युर ऐंुई ऐ ऐंुदुस्तानी' लिखकर शुरुआत की। 2. आचार्य शुक्ल ने आदिकाल को क्या नाम दिया? (A) सिद्ध सामंत काल (B) चारण काल (C) वीरगाथा काल (D) बीजवपन काल उत्तर: (C). व्याख्या: वीरतापूर्ण रासो ग्रंथों की प्रधानता के कारण उन्होंने इसे 'वीरगाथा काल' कहा। 3. 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता कौन हैं? (A) नरपति नाल्ह (B) जगनिक (C) चंदबरदायी (D) अमीर खुसरो उत्तर: (C). व्याख्या: इसे हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। 4. 'परमाल रासो' (आल्हा-खंड) किसकी रचना है? (A) जगनिक (B) दलपति विजय (C) सारंगधर (D) जोइंदु उत्तर: (A). व्याख्या: यह वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला लोक-काव्य है। 5. हिंदी के प्रथम कवि किसे माना जाता है?...

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 हिंदी साहित्य का प्राचीन (आदिकाल: 1050-1375 वि.सं.) और मध्यकालीन (भक्ति/रीतिकाल: 1375-1900 वि.सं.) इतिहास अपभ्रंश, वीरगाथा, और भक्तिपूर्ण काव्यों से समृद्ध है। आदिकाल में वीरगाथा (रासो काव्य) व सिद्ध-नाथ साहित्य था, जबकि मध्यकाल में निर्गुण-सगुण भक्ति (तुलसी, सूर, मीरा) और रीतिकालीन शृंगारिक काव्य ने हिंदी को समृद्ध किया।  प्राचीन और मध्यकालीन हिंदी साहित्येतिहास के मुख्य बिंदु: प्राचीन काल / आदिकाल (लगभग 1050-1375 वि.सं.): प्रवृत्ति: वीरगाथा (युद्ध वर्णन) और सिद्ध-नाथ साहित्य। मुख्य रचनाएँ: 'पृथ्वीराज रासो' (चंदबरदाई), 'बीसलदेव रासो' (नरपति नाल्ह)। भाषा: अपभ्रंश, डिंगल-पिंगल, और प्रारंभिक हिंदी। मध्यकालीन हिंदी साहित्य (भक्ति काल: 1375-1700 वि.सं.): निर्गुण धारा: कबीर (ज्ञानमार्गी), मलिक मुहम्मद जायसी (प्रेमाश्रयी-सूफी)। सगुण धारा: तुलसीदास (रामभक्ति), सूरदास (कृष्णभक्ति), मीराबाई। विशेषता: लोकभाषा का प्रयोग और धार्मिक सद्भाव। उत्तर मध्यकाल / रीतिकाल (1700-1900 वि.सं.): प्रवृत्ति: शृंगार रस, लक्षण ग्रंथ, और दरबारी संस्कृति। प्रमुख कवि: बिहारी, केशवदास, भूषण, घनानंद। भ...

50 MCQs शिक्षण अभिवृत्ति (Teaching Aptitude) के विभिन्न पहलुओं पर आधारित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न 50 (MCQs)

 शिक्षण अभिवृत्ति (Teaching Aptitude) के विभिन्न पहलुओं पर आधारित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न 50 (MCQs) व्याख्या सहित नीचे दिए गए हैं: भाग 1: शिक्षण की अवधारणा और उद्देश्य 1. शिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है? (A) पाठ्यक्रम पूरा करना (B) विद्यार्थियों को जानकारी देना (C) छात्रों की सोचने की शक्ति और व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाना (D) परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना उत्तर: (C) व्याख्या: शिक्षण केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि छात्र के व्यक्तित्व और व्यवहार का सर्वांगीण विकास करना है। 2. शिक्षण एक 'त्रिध्रुवीय' (Tri-polar) प्रक्रिया है। इसमें कौन शामिल नहीं है? (A) शिक्षक (B) छात्र (C) पाठ्यक्रम (D) प्रधानाचार्य उत्तर: (D) व्याख्या: प्रसिद्ध शिक्षाविद् जॉन डीवी के अनुसार, शिक्षण में शिक्षक, छात्र और पाठ्यक्रम तीन मुख्य ध्रुव होते हैं। 3. 'शिक्षण अभिवृत्ति' से क्या तात्पर्य है? (A) शिक्षक का वेतन (B) शिक्षक की पदोन्नति (C) शिक्षण के प्रति शिक्षक का सकारात्मक दृष्टिकोण और क्षमता (D) शिक्षक की उम्र उत्तर: (C) व्याख्या: शिक्षण अभिवृत्ति का अर्थ है शिक्षक की वह मानसि...
 शिक्षण अभिवृत्ति (Teaching Aptitude) शिक्षक की वह क्षमता और सकारात्मक मानसिकता है जो शिक्षण कार्य को प्रभावी ढंग से संपन्न करने के लिए आवश्यक है। इसके मुख्य पहलुओं का विवरण नीचे दिया गया है:  1. शिक्षण की अवधारणा (Concept of Teaching) शिक्षण एक सामाजिक और अंतःक्रियात्मक प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक, छात्र और पाठ्यक्रम के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है।  यह विद्यार्थी के व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाने और उसके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास (मन, आत्मा, चरित्र) से संबंधित है। आधुनिक संदर्भ में, यह केवल सूचना देना नहीं, बल्कि सीखने के लिए मार्गदर्शक और प्रेरक की भूमिका निभाना है।  2. शिक्षण के उद्देश्य (Objectives of Teaching) इसका मुख्य लक्ष्य छात्र को समाज का एक जिम्मेदार और कुशल नागरिक बनाना है।  व्यवहार में परिवर्तन: छात्र की कार्यक्षमता और आदतों में सकारात्मक बदलाव लाना। ज्ञान और कौशल का विकास: छात्रों को विशिष्ट विषयों का ज्ञान प्रदान करना और उनमें व्यावसायिक कौशल विकसित करना। बौद्धिक एवं नैतिक विकास: आलोचनात्मक सोच, तर्कशक्ति और नैतिक मूल्यों का संचार क...

शेखर: एक जीवनी' (भाग-1+भाग-2) पर आधारित ये 75 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

'शेखर: एक जीवनी' (भाग-1+भाग-2) पर आधारित ये 75 वस्तुनिष्ठ प्रश्न आपकी वैचारिक समझ और परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक होंगे। भाग 1: उपन्यास का स्वरूप और परिचय 1. 'शेखर: एक जीवनी' का प्रथम भाग किस वर्ष प्रकाशित हुआ? (A) 1940 (B) 1941 (C) 1944 (D) 1950 उत्तर: (B) व्याख्या: इसका प्रकाशन 1941 में हुआ था, जबकि दूसरा भाग 1944 में आया। 2. अज्ञेय ने इस उपन्यास को किस तकनीक में लिखा है? (A) वर्णनात्मक (B) फ्लैशबैक (स्मृति-पद्धति) (C) डायरी शैली (D) पत्रात्मक उत्तर: (B) व्याख्या: फाँसी की कोठरी में बैठा शेखर अपने बीते जीवन को याद करता है। 3. इस उपन्यास को हिन्दी का प्रथम _____ उपन्यास माना जाता है। (A) आंचलिक (B) ऐतिहासिक (C) मनोवैज्ञानिक (D) जासूसी उत्तर: (C) व्याख्या: इसमें व्यक्ति के अंतर्मन और कुंठाओं का गहरा विश्लेषण है। 4. अज्ञेय ने उपन्यास की भूमिका में 'शेखर' को क्या माना है? (A) अपना प्रतिनिधि (B) एक काल्पनिक नायक (C) मानवता का प्रतीक (D) एक अपराधी उत्तर: (A) व्याख्या: अज्ञेय ने स्वीकार किया है कि शेखर उनके अपने व्यक्तित्व का एक अंश है। 5. उपन्यास के प्रथम भाग ...

शेखर: एक जीवनी

 'अज्ञेय' द्वारा रचित उपन्यास 'शेखर: एक जीवनी' (भाग-1: उत्थान) हिन्दी साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित उपन्यासों में से एक है। 1941 में प्रकाशित यह उपन्यास अपनी मनोवैज्ञानिक गहराई और शिल्प के लिए जाना जाता है।  प्रमुख बिंदु और सारांश: कथानक का ढांचा: उपन्यास की शुरुआत फांसी की कोठरी में बैठे शेखर से होती है, जहाँ वह अपनी मृत्यु से पहले अपने बीते हुए जीवन का सिंहावलोकन (फ्लैशबैक) करता है। मुख्य पात्र (शेखर): शेखर एक विद्रोही स्वभाव का पात्र है। वह बचपन से ही परंपराओं, समाज और ईश्वर के प्रति प्रश्न उठाता है। उसकी विद्रोह की भावना उसे एक क्रांतिकारी बना देती है। बाल्यकाल और किशोरावस्था: भाग-1 मुख्य रूप से शेखर के बचपन और उसके विकास पर केंद्रित है। इसमें उसके माता-पिता के साथ तनावपूर्ण संबंध और उसके मन में उठने वाले यौन कौतूहल और जिज्ञासाओं का चित्रण है। शशि का पात्र: शशि, शेखर की मौसेरी बहन है, जो उसके जीवन में प्रेरणा और प्रेम का केंद्र बनती है। शशि का प्रभाव शेखर के व्यक्तित्व को गढ़ने में बहुत बड़ा है। मनोवैज्ञानिक आधार: यह उपन्यास फ्रायड के मनोविश्लेषणवाद से प्रभावित...

हिन्दी भाषा के उद्भव और प्राचीन भारतीय आर्य भाषाओं के विकास पर आधारित यह 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

हिन्दी भाषा के उद्भव और प्राचीन भारतीय आर्य भाषाओं के विकास पर आधारित यह 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) आपकी तैयारी में सहायक होंगे। भाग 1: प्राचीन भारतीय आर्य भाषा (वैदिक एवं लौकिक संस्कृत) 1. भारतीय आर्य भाषाओं के इतिहास को कितने कालों में विभाजित किया गया है? (A) दो (B) तीन (C) चार (D) पाँच उत्तर: (B) व्याख्या: इसे प्राचीन (1500-500 ई.पू.), मध्यकालीन (500 ई.पू.-1000 ई.) और आधुनिक (1000 ई. से अब तक) में बाँटा गया है। 2. प्राचीन भारतीय आर्य भाषा काल की समय सीमा क्या है? (A) 1500 ई.पू. से 500 ई.पू. (B) 1000 ई.पू. से 500 ई.पू. (C) 500 ई.पू. से 1 ई. (D) 1500 ई.पू. से 1000 ई. उत्तर: (A) 3. वेदों की रचना किस भाषा में हुई है? (A) लौकिक संस्कृत (B) पालि (C) वैदिक संस्कृत (D) प्राकृत उत्तर: (C) व्याख्या: इसे 'छन्दस्' या 'देववाणी' भी कहा जाता है। 4. पाणिनि की 'अष्टाध्यायी' ने किस भाषा को नियमबद्ध किया? (A) वैदिक संस्कृत (B) लौकिक संस्कृत (C) अपभ्रंश (D) हिन्दी उत्तर: (B) व्याख्या: पाणिनि ने लोक में प्रचलित संस्कृत को व्याकरण के नियमों में बांधा। 5. वैदिक संस्कृ...

हिन्दी भाषा का विकास

हिन्दी भाषा का विकास एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसकी जड़ें प्राचीन भारतीय आर्य भाषाओं में समाहित हैं। भारतीय आर्य भाषाओं के इतिहास को मुख्य रूप से तीन कालों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्राचीन काल सबसे आधारभूत है:  1. प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएं (1500 ई.पू. – 500 ई.पू.)  इस काल में दो मुख्य भाषाई स्वरूप विकसित हुए: वैदिक संस्कृत (1500 ई.पू. – 800 ई.पू.): यह सबसे प्राचीन रूप है जिसमें वेदों की रचना हुई। इसे 'छन्दस्' भी कहा जाता है। लौकिक (क्लासिक) संस्कृत (800 ई.पू. – 500 ई.पू.): पाणिनि के व्याकरण द्वारा संस्कृत को नियमबद्ध किया गया। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य इसी भाषा में रचे गए।  2. मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएं (500 ई.पू. – 1000 ई.)  यह काल संस्कृत के सरलीकरण और जनभाषाओं के उदय का था:  पालि (500 ई.पू. – 1 ई.): यह भारत की प्रथम देशभाषा मानी जाती है, जिसमें भगवान बुद्ध ने उपदेश दिए। प्राकृत (1 ई. – 500 ई.): इसे जनसाधारण की भाषा कहा गया। जैन साहित्य और संस्कृत नाटकों के पात्रों द्वारा इसका प्रयोग होता था। अपभ्रंश (500 ई. – 1000 ई.): यह प्राच...

हिंदी साहित्य भक्तिकाल MCQs

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भक्तिकाल हिंदी साहित्य का 'स्वर्ण युग' माना जाता है।  भक्तिकाल: महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) भाग 1: सामान्य परिचय एवं निर्गुण काव्यधारा 1. हिंदी साहित्य के किस काल को 'स्वर्ण युग' कहा जाता है? (A) आदिकाल (B) भक्तिकाल (C) रीतिकाल (D) आधुनिक काल उत्तर: (B) व्याख्या: जॉर्ज ग्रियर्सन ने सबसे पहले भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का 'स्वर्ण युग' घोषित किया था। 2. 'भक्ति' शब्द की व्युत्पत्ति किस धातु से हुई है? (A) भज (B) भक (C) भक्ति (D) भजन उत्तर: (A) व्याख्या: भक्ति शब्द संस्कृत की 'भज' धातु से बना है जिसका अर्थ है सेवा करना या भजना। 3. 'अद्वैतवाद' के प्रवर्तक कौन थे? (A) रामानुजाचार्य (B) मध्वाचार्य (C) शंकराचार्य (D) वल्लभाचार्य  उत्तर: (C) व्याख्या: शंकराचार्य ने "अहं ब्रह्मास्मि" का नारा दिया और अद्वैतवाद की स्थापना की। 4. कबीरदास के गुरु का क्या नाम था? (A) रैदास (B) रामानंद (C) वल्लभाचार्य (D) विट्ठलनाथ उत्तर: (B) व्याख्या: रामानंद के 12 शिष्यों में कबीर प्रमुख थे। रामानंद ने ही उत्तर भारत में भक्ति का...

भक्तिकाल: महत्वपूर्ण 50 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

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भक्तिकाल हिंदी साहित्य का 'स्वर्ण युग' माना जाता है।  भक्तिकाल: महत्वपूर्ण 50 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) भाग 1: सामान्य परिचय एवं निर्गुण काव्यधारा 1. हिंदी साहित्य के किस काल को 'स्वर्ण युग' कहा जाता है? (A) आदिकाल (B) भक्तिकाल (C) रीतिकाल (D) आधुनिक काल उत्तर: (B) व्याख्या: जॉर्ज ग्रियर्सन ने सबसे पहले भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का 'स्वर्ण युग' घोषित किया था। 2. 'भक्ति' शब्द की व्युत्पत्ति किस धातु से हुई है? (A) भज (B) भक (C) भक्ति (D) भजन उत्तर: (A) व्याख्या: भक्ति शब्द संस्कृत की 'भज' धातु से बना है जिसका अर्थ है सेवा करना या भजना। 3. 'अद्वैतवाद' के प्रवर्तक कौन थे? (A) रामानुजाचार्य (B) मध्वाचार्य (C) शंकराचार्य (D) वल्लभाचार्य  उत्तर: (C) व्याख्या: शंकराचार्य ने "अहं ब्रह्मास्मि" का नारा दिया और अद्वैतवाद की स्थापना की। 4. कबीरदास के गुरु का क्या नाम था? (A) रैदास (B) रामानंद (C) वल्लभाचार्य (D) विट्ठलनाथ उत्तर: (B) व्याख्या: रामानंद के 12 शिष्यों में कबीर प्रमुख थे। रामानंद ने ही उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार क...