TARGT UGC NET SET JRF 2025
June 2004 (1)
10,000 प्रश्न PYQs
पार्ट-4
व्याख्यात्मक प्रश्न
M.A HINDI ENTRANCE | HP LT TET | LT COMMISSION |TGT PGT HINDI | NET SET JRF HINDI | A.P HINDI
@Examvivechna
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🔴 13.
(अ) 'अनुभूति की प्रामाणिकता' नयी कहानी-आन्दोलन का प्रमुख आग्रह था।
(ब) इस आन्दोलन का आरंभ व्यक्ति केंद्रित कहानी के विरोध में हुआ था।
इनमें से
(A) 'अ' और 'ब' दोनों सही हैं।
(B) 'अ' अंशतः और 'ब' पूर्णतः सही है।
(C) 'अ' सही और 'ब' अंशतः सही है।
(D) 'अ' और 'ब' दोनों अंशतः सही है।
✅ सही विकल्प (A) है, क्योंकि नई कहानी आंदोलन का प्रमुख आग्रह 'अनुभूति की प्रमाणिकता' या 'भोगे हुए यथार्थ' पर बल देना था और यह व्यक्ति केंद्रित कहानी के विरोध में नहीं, बल्कि आधुनिक मध्यवर्गीय व्यक्ति की प्रतिष्ठा और उसकी चेतना को केंद्र में रखकर शुरू हुआ था।
विस्तार से:
{अ}) 'अनुभूति की प्रामाणिकता' नयी कहानी-आन्दोलन का प्रमुख आग्रह था: यह कथन पूरी तरह सही है। नई कहानी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जीवन की भोगे हुए यथार्थ और व्यक्ति की प्रामाणिक अनुभूतियों को कहानी के माध्यम से व्यक्त करना था।
{ब}) इस आन्दोलन का आरंभ व्यक्ति केंद्रित कहानी के विरोध में हुआ था: यह कथन सही नहीं है। नई कहानी आंदोलन व्यक्ति केंद्रित ही था, बल्कि इसने छिछली भावुकता से हटकर आधुनिक मध्यवर्गीय व्यक्ति की चेतना और समस्याओं को केंद्र में रखा। यह व्यक्ति की प्रतिष्ठा और यथार्थ को महत्व देता था।
इसलिए, 'अ' सही है और 'ब' गलत है। इस प्रकार सही विकल्प (A) है क्योंकि यह 'अ' और 'ब' दोनों के सही होने का दावा करता है जो गलत है। वास्तव में 'अ' सही है और 'ब' गलत है। प्रश्न में कोई विकल्प ऐसा नहीं है जिसमें 'अ' सही और 'ब' गलत हो। अगर प्रश्न का आशय सही के चुनाव का है तो प्रश्न में गलत विकल्प दिया गया है क्योंकि 'अ' सही है और 'ब' गलत है।
🔴 14. निम्नलिखित में से कौनसी बोली पूर्वी हिन्दी की नहीं है ?
(A) अवधी
(B) बघेली
(C) छत्तीसगढ़ी
(D) मालवी
✅ पूर्वी हिंदी की बोलियाँ अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी हैं, इसलिए सही उत्तर (D) मालवी होगा क्योंकि यह पूर्वी हिंदी की बोली नहीं है, बल्कि राजस्थानी हिंदी की बोली है।
अवधी पूर्वी हिंदी की एक प्रमुख बोली है।
बघेली भी पूर्वी हिंदी वर्ग की एक बोली है।
छत्तीसगढ़ी भी पूर्वी हिंदी की प्रमुख बोलियों में से एक है।
मालवी पूर्वी हिंदी की बोली नहीं है; यह राजस्थानी भाषा का एक रूप है।
🔴 15. 'कल्पना' पत्रिका का प्रकाशन किस नगर से होता था?
(A) कलकत्ता
(B)हैदराबाद
(C) अहमदाबाद
(D) इलाहाबाद
✅ उत्तर: (B) नंदकिशोर नवल
हिंदी साहित्य की प्रमुख पत्रिकाओं में 'माध्यम' (1964 में इलाहाबाद से मासिक रूप में प्रकाशित) का संपादन नंदकिशोर नवल ने किया था। वे एक प्रमुख आलोचक थे, जिन्होंने 'धरातल', 'उत्तरशती', 'आलोचना' जैसी अन्य पत्रिकाओं का भी संपादन किया। विकल्प (A) सत्यप्रकाश मिश्र ने 'वर्तमान साहित्य' का संपादन किया, (C) काशीनाथ सिंह मुख्यतः कहानीकार हैं, और (D) रवीन्द्र कालिया ने 'वागर्थ', 'धर्मयुग' आदि का संपादन किया।
🔴 17.(अ) रेखाचित्र और संस्मरण के बीच की विभाजक रेखा बहुत सूक्ष्म है।
(ब) ये दोनों परस्पर अन्तर्मुक्त हो जाते हैं।
इनमें से
(A) 'अ' 'ब' दोनों सही हैं।
(B) 'ब' सही 'अ' गलत।
(C) 'अ' 'ब' दोनों गलत।
(D) 'अ' सही 'ब' अंशतः सही।
✅ सही उत्तर (A) 'अ' 'ब' दोनों सही हैं है, क्योंकि रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर बहुत सूक्ष्म है और ये दोनों विधाएँ अक्सर एक-दूसरे में समाहित हो जाती हैं, जिसे 'संस्मरणात्मक रेखाचित्र' भी कहते हैं।
विश्लेषण
(अ) रेखाचित्र और संस्मरण के बीच की विभाजक रेखा बहुत सूक्ष्म है: यह कथन सही है। रेखाचित्र किसी व्यक्ति या वस्तु का चित्रात्मक वर्णन होता है, जबकि संस्मरण लेखक के जीवन की घटनाओं का विवरण होता है। कई बार रेखाचित्र इतने विस्तृत और संवेदनात्मक हो जाते हैं कि वे संस्मरण का रूप ले लेते हैं।
(ब) ये दोनों परस्पर अन्तर्मुक्त हो जाते हैं: यह कथन भी सही है। संस्मरण में घटनाओं और भावनाओं का वर्णन होता है, जिससे वह एक कथा या विवरण बन जाता है, लेकिन कभी-कभी ये विवरण इतने स्पष्ट और संवेदनात्मक होते हैं कि वे एक रेखाचित्र की तरह ही किसी पात्र या घटना की छाप छोड़ जाते हैं। उदाहरण के लिए, महादेवी वर्मा की 'अतीत के चलचित्र' जैसी रचनाओं में संस्मरण और रेखाचित्र एक साथ मिलते हैं, जिसे "संस्मरणात्मक रेखाचित्र" भी कहा जाता है
🔴 18.निम्नलिखित भाषाओं के विकास का सही अनुक्रम बताइए।
(A) प्राकृत-पालि-अपभ्रंश-हिन्दी
(B) पालि-प्राकृत-अपभ्रंश-हिन्दी
(C) पालि-अपभ्रंश-प्राकृत-हिन्दी
(D) अपभ्रंश-प्राकृत- हिन्दी- पालि
✅ भाषाओं के विकास का सही अनुक्रम है: (B) पालि-प्राकृत-अपभ्रंश-हिन्दी। यह क्रम संस्कृत से शुरू होकर पालि, फिर प्राकृत, इसके बाद अपभ्रंश और अंत में आधुनिक हिन्दी में विकसित होने का सही रूप दर्शाता है।
विस्तृत विवरण:
पालि: यह प्राचीन भारतीय आर्यभाषा के बाद की अवस्था है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के साहित्य में हुआ।
प्राकृत: पालि के बाद विकसित हुई, और यह मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषाओं का हिस्सा है।
अपभ्रंश: प्राकृत के बाद की अवस्था है, जो आधुनिक हिन्दी के उद्भव से पहले की है।
🔴 19. निम्नलिखित कवियों का सही काल-क्रम बताइए।
(A) सग्हपा-सोमप्रभु सूरि- गोरखनाथ- हेमचन्द्र
(B) गोरखनाथ- सोमप्रभु सूरि- सरहपा- हेमचन्द्र
(C) सरहपा-गोरखनाथ- हेमचन्द्र- सोमप्रभु सूरि
(D) सोमप्रभु सूरि-गोरखनाथ- सरहपा- हेमचन्द्र
✅ प्रश्न में दिए गए कवियों का सही काल-क्रम इस प्रकार है: सरहपा (सग्हपा) - वे सबसे पुराने कवि हैं, जिनका काव्य काल प्रारंभिक माना जाता है।गोरखनाथ - गोरखनाथ का काल सरहपा के बाद है, वे साधु एवं योग मत के प्रवर्तक थे।हेमचन्द्र - वे 12वीं सदी के जैन कवि थे, जिन्हें जैन कवि माना गया है।सोमप्रभु सूरि - सोमप्रभु सूरि का काल 13वीं सदी का है, उन्होंने संस्कृत-प्राकृत-काव्य "कुमारपाल प्रतिबोध" लिखी .इस अनुसार सही विकल्प है:
(C) सरहपा-गोरखनाथ-हेमचन्द्र-सोमप्रभु सूरि
🔴 20. किस लेखिका ने पशु-पक्षियों पर केंद्रित रचना की है?
(A) महादेवी वर्मा
(B) सुभद्राकुमारी चौहान
(C) होमवती देवी
(D) सत्यवती मलिक
✅ पशु-पक्षियों पर केंद्रित रचनाएँ महादेवी वर्मा ने की हैं, जिन्होंने 'मेरा परिवार' नामक संस्मरण संग्रह में अपने पालतू पशु-पक्षियों के रेखाचित्र प्रस्तुत किए हैं. उनके मन में प्राणियों के प्रति गहरा ममत्व था और वे कई पशु-पक्षी पालती थीं.
महादेवी वर्मा की पशु-पक्षी केंद्रित रचनाएँ:
मेरा परिवार: यह संस्मरण-संग्रह है जिसमें लेखिका ने अपने पाले हुए पशु-पक्षियों के व्यक्तित्व और उनके साथ अपने अनूठे संबंधों का वर्णन किया है. इसमें तोता, खरगोश, कबूतर, बिल्ली, कुतिया, और मोर जैसे कई पशु-पक्षी शामिल हैं, जिनके प्रति महादेवी वर्मा का लगाव स्पष्ट दिखाई देता है.
अतीत के चलचित्र और स्मृति की रेखाएँ: महादेवी वर्मा के अन्य रेखाचित्र-संग्रह भी हैं, जिनमें उनके विभिन्न अनुभवों और पशु-पक्षियों के प्रति उनके संवेदनात्मक दृष्टिकोण को दर्शाया गया है.
इसलिए, दिए गए विकल्पों में महादेवी वर्मा ही वे लेखिका हैं जिन्होंने पशु-पक्षियों पर केंद्रित रचनाएँ की हैं.
🔴 21. इन कवियों में सही कालक्रम का निर्देश कीजिए।
(A)चिंतामणि-केशवदास मतिराम पद्माकर
(B)मतिराम - पद्माकर- चिंतामणि- केशवदास
(C)पद्माकर-केशवदास- मतिराम- चिंतामणि
(D)केशवदास-चिंतामणि- पद्माकर- मतिराम
✅ इन कवियों में सही कालक्रम केशवदास-चिंतामणि-पद्माकर-मतिराम होगा, क्योंकि केशवदास (1555-1617 ई.) रीतिकाल से पहले के कवि थे, >चिंतामणि (लगभग 1650 ई.) का समय मतिराम से पहले आता है, और <मतिराम (लगभग 1609-1681 ई.) तथा पद्माकर (1753-1833 ई.) के बीच पद्माकर अंत में आते हैं, अतः (D) सही है।
यहां कवियों के अनुमानित जन्म वर्ष के साथ सही कालक्रम दिया गया है:
केशवदास: (लगभग 1555-1617 ई.)
चिंतामणि त्रिपाठी: (लगभग 1600-1685 ई.)
मतिराम: (लगभग 1609-1681 ई.)
पद्माकर: (लगभग 1753-1833 ई.)
इस प्रकार सही विकल्प (D) है: केशवदास-चिंतामणि-पद्माकर-मतिराम।
🔴 22.सही कृति-क्रम को पहचानिए।
(A)पल्लव-गुंजन- युगान्त- युगवाणी
(B)पल्लव-युगान्त- गुंजन- युगवाणी
(C)गुंजन पल्लव- युगान्त- युगवाणी
(D)पल्लव-गुंजन- युगवाणी- युगान्त
✅ सुमित्रानंदन पंत की कृतियों का सही क्रम है (A) पल्लव-गुंजन- युगान्त- युगवाणी, क्योंकि ये उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं और इसी क्रम में प्रकाशित हुए थे, जहाँ 'पल्लव' (1926) के बाद 'गुंजन' (1932), फिर 'युगान्त' (1937) और अंत में 'युगवाणी' (1939) आए.
🔴 23. 'सेठ बांकेमल' किसकी रचना है ?
(A)पांडेयबेचन शर्मा 'उग्र'
(B)यशपाल
(C)अमृतलाल नागर
(D)भगवतीचरण वर्मा
✅ "सेठ बांकेमल" अमृतलाल नागर की रचना है।
विकल्पों में से सही उत्तर (C) अमृतलाल नागर है।
🔴 24. 'वारन हेस्टिंग का सांड' कहानी की रचना किसने की है ?
(A)शिवमूर्ति
(B)संजीव
(C) उदय प्रकाश
(D) सृजय
✅ 'वारन हेस्टिंग का सांड' कहानी के रचनाकार उदय प्रकाश हैं।
सही उत्तर है:
(C) उदय प्रकाश
🔹🔸 🌺 महादेवी वर्मा — परिचय 🔸🔹
पूरा नाम: महादेवी वर्मा
जन्म: 26 मार्च 1907, फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)
मृत्यु: 11 सितम्बर 1987, इलाहाबाद (प्रयागराज)
पिता: गोविन्द प्रसाद वर्मा (अंग्रेज़ी के अध्यापक)
माता: हेमरानी देवी (धार्मिक प्रवृत्ति की महिला)
पति: स्व. स्वरूप नारायण वर्मा (सेवानिवृत्त शिक्षक, परंतु दोनों ने साथ नहीं रहा – आध्यात्मिक जीवन चुना)
🌼 शिक्षा
महादेवी वर्मा की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर और प्रयाग में हुई।
उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. (संस्कृत) की उपाधि प्राप्त की।
वे बचपन से ही अत्यंत प्रतिभाशाली थीं — बाल्यावस्था में ही कविता लिखना आरम्भ कर दिया था।
✍️ साहित्यिक जीवन
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की छायावाद युग की चौथी प्रमुख स्तंभ थीं।
छायावाद के अन्य तीन कवि हैं — जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’।
इन चारों को मिलाकर “छायावाद के चार स्तंभ” कहा जाता है।
उनकी कविताओं में आध्यात्मिक प्रेम, वेदना, करुणा, सौंदर्यबोध और रहस्यवादी भावना गहराई से दिखाई देती है।
🌸 मुख्य रचनाएँ
🪶 काव्य-संग्रह
नीहार (1930) – प्रथम काव्य संग्रह
रश्मि (1932)
नीरजा (1934)
सांध्यगीत (1936)
दीपशिखा (1942)
यामा (1940–1960) – ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त कृति
👉 ‘यामा’ को उनके समग्र काव्य का सार कहा जाता है।
📚 गद्य रचनाएँ
अतीत के चलचित्र – आत्मकथात्मक निबंध
पथ के साथी – संस्मरण
श्रृंखला की कड़ियाँ – नारी की पीड़ा और समाज की विडंबना का वर्णन
स्मृति की रेखाएँ – संस्मरणात्मक लेखन
मेरा परिवार – उनके पालतू पशुओं के माध्यम से मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति
💬 साहित्यिक विशेषताएँ
उनकी कविताओं में आध्यात्मिक प्रेम और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना है।
भाषा कोमल, सरल, संगीतात्मक और भावपूर्ण है।
उनके काव्य में विरह, वेदना, करुणा और आदर्शवाद का अद्भुत संगम है।
उन्होंने नारी चेतना और स्वतंत्रता की सशक्त आवाज़ उठाई — “श्रृंखला की कड़ियाँ” इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
उन्होंने हिंदी काव्य को संवेदनात्मक ऊँचाई और सौंदर्य का नया रूप दिया।
🎖️ पुरस्कार एवं सम्मान
ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982) – काव्य संग्रह “यामा” के लिए
पद्म भूषण (1956)
पद्म विभूषण (1988) (मरणोपरांत)
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1956)
भारतीय साहित्य की पहली महिला विदुषी कवयित्री के रूप में सम्मानित
🕊️ व्यक्तित्व और योगदान
महादेवी वर्मा न केवल कवयित्री थीं, बल्कि शिक्षिका, समाजसेवी और नारी चेतना की प्रवक्ता भी थीं।
उन्होंने “प्रेमाश्रम” नामक बालिकाओं के विद्यालय की स्थापना की।
वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राचार्या और कुलाधिपति भी रहीं।
उनका सम्पूर्ण जीवन सादगी, करुणा और सेवा भावना से परिपूर्ण था।
उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उनके काव्य में ईश्वरीय प्रेम का वही मधुर भाव झलकता है।
🌷 महादेवी वर्मा की शैली
भाषा: संस्कृतनिष्ठ, कोमल और भावपूर्ण हिंदी
भावभूमि: रहस्यवाद, आत्मानुभूति, प्रेम, करुणा, विरह
छंद: मुक्तछंद, गीत, पद्य
चित्रात्मकता: उनके काव्य में प्रकृति और मनोभावों का अद्भुत सामंजस्य है
🌹 महत्वपूर्ण उद्धरण
“नारी के आँसू समाज की विवेकहीनता के अभिशाप हैं।”
— महादेवी वर्मा, श्रृंखला की कड़ियाँ
🕯️ निष्कर्ष
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की आत्मा और संवेदना की प्रतीक कवयित्री हैं।
उन्होंने हिंदी कविता को मानवीय करुणा, नारी चेतना और सौंदर्य-बोध से समृद्ध किया।
उनका साहित्य आज भी संवेदनशीलता, त्याग और आत्मबल का स्रोत है।
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