HP TET Language Teacher 

Question Paper 

Held on 26 august 2020

Part -1


🔴 1. 'स्नेह निर्झर बह गया है' कविता के रचयिता हैं :

(A) प्रसाद

(B) पंत

(C) महादेवी वर्मा

(D) निराला

✅ 'स्नेह निर्झर बह गया है' कविता के रचयिता (D) निराला हैं, जो सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के नाम से भी जाने जाते हैं। यह उनकी एक प्रसिद्ध कविता है जो उनके अणिमा नामक काव्य-संग्रह में संकलित है।  

विस्तार से:

रचयिता: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'। 

काव्य संग्रह: अणिमा। 

कविता की पंक्ति: इस कविता की शुरुआती पंक्तियाँ हैं, "स्नेह-निर्झर बह गया है, रेत ज्यों तन रह गया है"। 

विषय: इस कविता में कवि ने समय के महत्व और प्रेम के भाव के धीरे-धीरे खत्म होने पर प्रकाश डाला है। 

🔸 कवि "सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'" 

🌿 परिचय :


पूरा नाम: सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

जन्म: 21 फरवरी 1896 ई०, महिषादल (जिला मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल)

मृत्यु: 15 अक्टूबर 1961 ई०, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

पिता: पंडित रामसहाय त्रिपाठी

माता: जीयादेवी

🌻 जीवन परिचय :


सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म बंगाल के महिषादल में हुआ, किंतु उनके पूर्वज उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़कोला नामक गाँव के थे। बाल्यावस्था बंगाल में बीती, इसलिए वे हिन्दी और बंगला दोनों भाषाओं में पारंगत थे।

कम उम्र में ही माता का निधन हो गया और किशोरावस्था में ही विवाह हुआ। पत्नी, पुत्री, पिता — सबकी अकाल मृत्यु से उन्हें गहन दुःख मिला, जिसने उनके व्यक्तित्व को संवेदनशील और करुणामय बना दिया।

🪶 शिक्षा :


निराला ने प्रारंभिक शिक्षा बंगला माध्यम से प्राप्त की। उन्होंने संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी का भी अध्ययन किया। वे अत्यंत स्वाध्यायी व्यक्ति थे — अपने अध्ययन से उन्होंने साहित्य, दर्शन, संगीत और समाजशास्त्र में गहरी जानकारी प्राप्त की।


🕊️ व्यक्तित्व और स्वभाव :

निराला अत्यंत स्वाभिमानी, स्वतंत्र विचारक और विद्रोही स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने समाज, धर्म और परम्पराओं की रूढ़ियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उनके जीवन में गरीबी, उपेक्षा और संघर्ष का गहरा असर था, जो उनकी रचनाओं में भी झलकता है।


📚 साहित्यिक परिचय :

निराला छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे —

👉 जयशंकर प्रसाद

👉 सुमित्रानंदन पंत

👉 महादेवी वर्मा

👉 सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’


इन चारों ने हिन्दी कविता में भावुकता, सौन्दर्य, प्रकृति और आत्माभिव्यक्ति का नया युग आरंभ किया।

✨ रचनाएँ :

1. काव्य-संग्रह :अनामिका (1917), परिमल, गीतिका


जुही की कली


सरोज-स्मृति


अणिमा


अराधना


नये पत्ते


बेला


कुकुरमुत्ता


अणिमा


अर्चना



> 🔹 ‘सरोज-स्मृति’ उनकी मृत पुत्री सरोज की स्मृति में रची गयी अत्यंत मार्मिक कविता-संग्रह है।


2. उपन्यास :


प्रभावती


अप्सरा


अलका


कुल्ली भाट


निरुपमा

3. कहानी-संग्रह :


लीली


चतुरी चमार


सुकुल की बीवी


4. निबंध-संग्रह :


प्रबंध पद्म


रवीन्द्र-पूजा


विचार-विमर्श


🎨 साहित्यिक विशेषताएँ :


1. मानवता और करुणा की भावना – उनकी कविताएँ गरीबों, श्रमिकों और समाज के वंचित वर्ग के प्रति सहानुभूति से भरी हैं।



2. स्वतंत्रता और विद्रोह का स्वर – अन्याय, शोषण और सामाजिक विषमता के विरुद्ध उनका स्वर प्रखर है।



3. छायावाद से प्रगतिवाद की ओर पुल – निराला ने छायावाद की भावुकता को सामाजिक यथार्थ से जोड़ा।



4. भाषा की नवीनता – उन्होंने संस्कृतनिष्ठ, तत्सम शब्दों से युक्त प्रभावशाली भाषा का प्रयोग किया।



5. कविता में संगीत और लय – उनकी कविताओं में भावों के साथ गूढ़ संगीतात्मकता भी है।

💫 प्रमुख कविताएँ :


वह तोड़ती पत्थर


राम की शक्तिपूजा


जूही की कली

भिक्षुक

सरोज-स्मृति

आज सृजन के द्वार खले हैं

गीत नया गाता हूँ

🏵️ महत्व एवं योगदान :

निराला हिन्दी कविता के ऐसे कवि थे जिन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें सामाजिक चेतना, विद्रोह, करुणा और मानवता का समावेश किया।

वे हिन्दी कविता को आधुनिकता की दिशा में ले जाने वाले कवि माने जाते हैं।

📜 प्रसिद्ध पंक्तियाँ :

> “वह तोड़ती पत्थर — देख मैंने इलाहाबाद के पथ पर।”

“राम! तुम्हारा चरित स्वयं ही कवि-काव्य-नाटक बन जाता है।”

“मैं गीत नया गाता हूँ।

🕯️ निधन :

15 अक्टूबर 1961 को इलाहाबाद में अत्यंत दारुण परिस्थितियों में निराला का निधन हुआ।


🔴 2. 'दिनकर' द्वारा लिखित निबन्ध है :


(A) जीने की कला


(B) एक साहित्यिक की डायरी


(C)


नेता नहीं नागरिक चाहिए.


(D)


समय-समय पर

✅ रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखित निबंध (C) नेता नहीं नागरिक चाहिए है। अन्य विकल्प दिनकर की रचनाओं से संबंधित नहीं हैं; 'एक साहित्यिक की डायरी' गजानन माधव मुक्तिबोध की रचना है, और 'समय-समय पर' किसी प्रसिद्ध निबंध या साहित्यिक कृति का शीर्षक नहीं है, जबकि 'जीने की कला' भी किसी प्रसिद्ध कृति का नाम नहीं है। 

विस्तार से:

(C) नेता नहीं नागरिक चाहिए: यह रामधारी सिंह दिनकर के निबंधों में से एक है, जिसमें उन्होंने नागरिकता और नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डाला है


🔴 3. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा सम्पादित पत्रिका है


(A) कविवचन सुधा


(B) समन्वय


(C) प्रतीक

(D)

विशाल भारत

✅ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा संपादित पत्रिका 'कविवचन सुधा' है, जो 15 अगस्त 1867 को वाराणसी से प्रकाशित हुई थी। यह एक क्रांतिकारी प्रकाशन था जिसने हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता को नए आयाम दिए। 

(A) कविवचन सुधा: यह भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा संपादित एक प्रमुख हिन्दी समाचारपत्र था। 

(B) समन्वय: यह पत्रिका भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा संपादित नहीं थी, बल्कि इसका सम्पादन अन्य साहित्यकारों ने किया था। 

(C) प्रतीक: यह पत्रिका भी भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा संपादित नहीं थी। 

(D) विशाल भारत: इस पत्रिका का संपादन भी भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा नहीं किया गया था। 

🔸 भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को "आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह" कहा जाता है, जो कवि, नाटककार, निबंधकार और पत्रकार थे. उन्होंने अपनी रचनाओं में गरीबी, पराधीनता और सामाजिक विसंगतियों पर प्रकाश डाला और राष्ट्रीय चेतना व सामाजिक सुधारों पर जोर दिया. उन्होंने 'कविवचन सुधा', 'हरिश्चंद्र चंद्रिका' और 'बाला बोधिनी' जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया.  


🔴 4. 'यशोधरा' कविता के रचनाकार कौन हैं ?


(A) जयशंकर प्रसाद


(B)


रामधारी सिंह दिनकर


(C)


मैथिलीशरण गुप्त


(D)


भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

✅ 'यशोधरा' कविता के रचनाकार मैथिलीशरण गुप्त हैं। यह एक प्रसिद्ध प्रबंध काव्य है, जो 1933 में प्रकाशित हुआ था और इसमें गौतम बुद्ध के गृहत्याग की कहानी को केंद्र में रखा गया है। 

सही विकल्प है:

(C) मैथिलीशरण गुप्त

अन्य कवियों की रचनाएँ: 

जयशंकर प्रसाद: कामायनी, आँसू, लहर

रामधारी सिंह दिनकर: रश्मिरथी, उर्वशी (यह विकल्प में नहीं दिया गया है, पर यशोधरा के संदर्भ में इनकी तुलना की जा सकती है)

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र: यह प्रेम से सम्बंधित कविताएँ लिखते थे।

🔴 5.


इनमें से कौन 'कफन' महानी का पात्र नहीं है ?


(A) माधव


(B) मधुआ


(C) घीसू


(D) बुधिया

✅ 'कफन' कहानी का पात्र मधुआ नहीं है, जबकि माधव, घीसू, और बुधिया इस कहानी के मुख्य पात्र हैं. इस कहानी में घीसू और उसके पुत्र माधव को निर्धन और कामचोर दिखाया गया है, जो अपनी पत्नी बुधिया की मृत्यु के बाद कफन के लिए मिले पैसों से शराब और खाना खरीदते हैं. 

सही उत्तर है: (B) मधुआ

स्पष्टीकरण:

माधव: घीसू का बेटा और कहानी का एक मुख्य पात्र. 

घीसू: माधव का पिता और कहानी का एक मुख्य पात्र. 

बुधिया: माधव की पत्नी, जिसकी प्रसव पीड़ा में मृत्यु हो जाती है. 

मधुआ: यह 'कफन' कहानी का पात्र नहीं है, बल्कि संभवतः किसी अन्य कहानी से जुड़ा नाम हो सकता है. 


🔴 6.उद्देश्य' और विधेय किसके अव्यव हैं 

(A) शब्द

B. अर्थ 

C. वाक्य

(D) वर्ण

✅ उद्देश्य और विधेय वाक्य के अवयव हैं, जहाँ उद्देश्य वाक्य में जिस व्यक्ति या वस्तु के बारे में बात की जाती है, उसे कहा जाता है, और विधेय उद्देश्य के बारे में कही गई बात होती है। 

उदाहरण: 

शैलेश विद्यालय जा रहा है।:

इस वाक्य में 'शैलेश' उद्देश्य है, क्योंकि उसके बारे में बात की जा रही है।

'विद्यालय जा रहा है' विधेय है, क्योंकि यह 'शैलेश' के बारे में कही गई बात है।

निष्कर्ष:

उद्देश्य और विधेय, मिलकर एक पूर्ण वाक्य बनाते हैं। 

प्रत्येक पूर्ण वाक्य में एक उद्देश्य और एक विधेय होता है। 


🔴 7.


(,) चिह्न को क्या कहते हैं ?


(A) अल्प विराम


(B) अर्द्धविराम


(C) संक्षेप चिह्न


(D) योजक चिह्न

✅ (,) चिह्न को अल्पविराम कहते हैं, जो एक संक्षिप्त ठहराव या वाक्य के विभिन्न भागों को अलग करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 

अल्पविराम (,): यह चिह्न एक छोटे से ठहराव के लिए प्रयोग होता है या जब वाक्य के विभिन्न हिस्सों को एक-दूसरे से अलग करना हो, जैसे किसी सूची में या उपवाक्यों को अलग करते समय। 

अर्द्धविराम (;): यह अल्पविराम से अधिक ठहराव को दर्शाता है और एक पूर्ण विराम से कम, Quora इसका प्रयोग अक्सर दो स्वतंत्र उपवाक्यों को जोड़ने के लिए किया जाता है। 

संक्षेप चिह्न (०): यह एक लाघव चिह्न होता है, जो किसी शब्द के संक्षेप या लोप को दर्शाने के लिए प्रयोग होता है, जैसे '०' या '()'। 

योजक चिह्न (-): यह चिह्न दो शब्दों को जोड़ने के लिए प्रयोग होता है, जैसे 'लाभ-हानि' या 'माता-पिता'। 


🔴 8.शब्द शक्ति के कितने भेद होते हैं ?


(A) दो


(B) तीन


(C) चार


(D) पाँच

✅ शब्द शक्ति के तीन भेद होते हैं: अभिधा, लक्षणा और व्यंजना। 

अभिधा: यह शब्द की वह शक्ति है जिससे शब्द के मुख्य या सीधे अर्थ का बोध होता है।

लक्षणा: जब शब्द का मुख्य अर्थ बाधित हो जाता है, तो उस शब्द के माध्यम से किसी रूढ़ या प्रयोजनवश होने वाले अर्थ का ज्ञान लक्षणा शक्ति से होता है।

व्यंजना: यह वह शक्ति है जो शब्द के मुख्य या लक्षणिक अर्थ के अतिरिक्त अन्य अर्थ या व्यंग्य का बोध कराती है।


🔴 9. रौद्ररस का स्थायीभाव क्या है ?


(A) भय


(B) उत्साह


(C) घृणा


(D) क्रोध

✅ रौद्ररस का स्थायीभाव (D) क्रोध है. रौद्र रस तब उत्पन्न होता है जब किसी व्यक्ति या पक्ष के द्वारा दूसरे का अपमान या अपकार किया जाता है, जिससे अत्यधिक क्रोध की भावना आती है. 

विस्तार से समझें

रौद्र रस: यह एक काव्य रस है जो व्यक्ति के भीतर उत्पन्न होने वाले स्थायी भाव 'क्रोध' से संबंधित है. 

स्थायीभाव: रस की उत्पत्ति का मूल कारण होता है, जो मन में हमेशा विद्यमान रहता है और उपयुक्त परिस्थितियों में जागृत होता है. 

उदाहरण: जब कोई गुरुजन या किसी प्रिय व्यक्ति का अपमान करता है, तो उसके हृदय में क्रोध की भावना उत्पन्न होती है, जो रौद्र रस को जन्म देती है. 

अन्य विकल्पों पर एक नज़र 

(A) भय: भयानक रस का स्थायीभाव है.

(B) उत्साह: वीर रस का स्थायीभाव है.

(C) घृणा: वीभत्स रस का स्थायीभाव है.

🔸 स्थायी भाव वे स्थायी भावनाएँ या मूल भाव हैं जो सहृदय व्यक्ति के मन में चिरकाल तक निवास करते हैं, और जो किसी रस के उत्पन्न होने का आधार बनते हैं। प्रत्येक रस का एक विशिष्ट स्थायी भाव होता है। उदाहरण के लिए, शृंगार रस का स्थायी भाव 'रति', हास्य रस का 'हास', और करुण रस का 'शोक' है। 

स्थायी भाव की परिभाषा 

मानव हृदय में स्थायी रूप से विद्यमान रहने वाले भाव को स्थायी भाव कहते हैं।

यह भाव मन में बीज रूप में, चिरकाल तक अचंचल होकर निवास करते हैं।

ये इतने प्रबल होते हैं कि अन्य भावों के आने पर भी अपने आप में विलीन हो जाते हैं।

स्थायी भाव के प्रकार और संबंधित रस

साहित्य शास्त्र में स्थायी भावों की संख्या नौ मानी जाती है, जिनके आधार पर नौ रस माने गए हैं। 

रति: (प्रेम): शृंगार रस

हास: (हँसी): हास्य रस

शोक: (दुःख): करुण रस

उत्साह: (वीरता): वीर रस

क्रोध: रौद्र रस

भय: भयानक रस

जुगुप्सा: (घृणा): वीभत्स रस

विस्मय: (आश्चर्य): अद्भुत रस

निर्वेद: (तटस्थता या वैराग्य): शांत रस

कुछ परंपराओं में वात्सल्य रस (स्नेह) और भगवान के प्रति प्रेम (ईश्वर विषयक प्रेम) को भी स्थायी भावों में गिना जाता है, जिससे इनकी संख्या 11 तक हो जाती है। 

स्थायी भाव का महत्व

स्थायी भाव ही वे मूल भावनाएँ हैं जो किसी न किसी रस के रूप में अभिव्यक्त होती हैं। 

प्रत्येक रस का एक निश्चित स्थायी भाव होता है, और जब यह भाव विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से पुष्ट होता है, तब रस की उत्पत्ति होती है।


🔴 10. रूपक किसका भेद है ?


(A) श्रव्य काव्य


(B) दृश्य काव्य


(C) महाकाव्य


(D) प्रबन्ध काव्य

✅ रूपक (B) दृश्य काव्य का भेद है, जिसे 'रूप का आरोप' होने के कारण रूपक कहा जाता है। दृश्य काव्य को इन्द्रियों द्वारा देखकर आनंद प्राप्त होता है और रूपक, नाटक, प्रकरण, भाण आदि इसके दस मुख्य भेद हैं। 

विस्तार से समझें:

दृश्य काव्य: वह काव्य जिसे देखा और सुना जा सकता है, जैसे नाटक या अभिनय। 

रूपक: दृश्य काव्य के ही एक भेद का नाम है। 

रूपक के दस भेद: इनमें नाटक, प्रकरण, भाण, व्यायोग, समवकार, डिम, ईहामृग, अंक, वीथी और प्रहसन शामिल हैं। 

इसलिए, सही उत्तर (B) दृश्य काव्य है। 


🔴 11. महाकाव्य किस का भेद है ?


(A) खण्ड काव्य


(B) मुक्तक काव्य


(C) प्रगीत


(D)

प्रबन्ध काव्य

✅ 

महाकाव्य प्रबंध काव्य का एक भेद है, जिसके तहत किसी महापुरुष के संपूर्ण जीवन या किसी पौराणिक/ऐतिहासिक घटना का आद्योपांत वर्णन होता है। प्रबंध काव्य के दो भेद होते हैं: महाकाव्य और खण्डकाव्य। 

सही विकल्प (D) प्रबन्ध काव्य है। 

विस्तार से समझें:

प्रबंध काव्य: यह एक ऐसी काव्य विधा है जिसमें कथावस्तु होती है और घटनाएँ क्रमबद्ध तरीके से वर्णित होती हैं। 

महाकाव्य: प्रबंध काव्य का वह रूप है जो किसी महापुरुष के संपूर्ण जीवन या महत्वपूर्ण ऐतिहासिक/पौराणिक घटना का विस्तृत वर्णन करता है। इसके उदाहरणों में 'पद्मावत' और 'रामचरितमानस' शामिल हैं। 

खण्डकाव्य: प्रबंध काव्य का दूसरा रूप है, जिसमें जीवन की किसी एक विशेष घटना का वर्णन किया जाता है। 

🔴 12. 'यमक' अलंकार कैसा अलंकार है ?


(A) शब्दालंकार


(B) अर्थालंकार


(C) उभयालंकार


(D) इनमें से कोई नहीं

✅ यमक अलंकार एक शब्दालंकार है, क्योंकि इसमें किसी शब्द के एक से अधिक बार प्रयोग होने पर हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है, जिससे काव्य की शोभा बढ़ती है. यमक अलंकार का प्रभाव शब्द पर आधारित होता है; यदि शब्द को उसके पर्यायवाची शब्द से बदल दिया जाए, तो अलंकार का प्रभाव समाप्त हो जाता है. 

यमक अलंकार की पहचान: 

एक ही शब्द का प्रयोग दो या दो से अधिक बार होता है.

प्रत्येक बार शब्द का अर्थ अलग-अलग होता है.

उदाहरण: 

कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय, या खाए बौराय जग, वा पाये बौराय.

यहाँ 'कनक' शब्द दो बार आया है.

पहले 'कनक' का अर्थ 'स्वर्ण' है और दूसरे 'कनक' का अर्थ 'धतूरा' है.

🔸 अलंकार वह साहित्यिक तत्व है जो किसी कविता, गद्य या अन्य साहित्यिक रचना की शोभा बढ़ाता है, ठीक वैसे ही जैसे गहना शरीर की सुंदरता बढ़ाता है. यह शब्दों और अर्थों को विशेष ढंग से सजाकर सौंदर्य, आकर्षण और प्रभाव उत्पन्न करता है. अलंकार के मुख्य भेद शब्दालंकार (जो शब्दों के माध्यम से सौंदर्य उत्पन्न करते हैं) और अर्थालंकार (जो अर्थ के माध्यम से सौंदर्य उत्पन्न करते हैं) हैं. 

अलंकार के मुख्य भेद

अलंकार दो प्रमुख प्रकार के होते हैं: 

शब्दालंकार: वे अलंकार जो शब्द के प्रयोग के कारण काव्य में सौंदर्य लाते हैं.

उदाहरण: अनुप्रास अलंकार (एक वर्ण की पुनरावृति), यमक अलंकार (एक शब्द के दो भिन्न अर्थ), श्लेष अलंकार (एक शब्द के अनेक अर्थ)

अर्थालंकार: वे अलंकार जो काव्य के अर्थ में सौंदर्य और गहराई लाते हैं.

उदाहरण: उपमा अलंकार (दो वस्तुओं की समानता), रूपक अलंकार (दो वस्तुओं के बीच कोई भेद न होना), अतिशयोक्ति अलंकार (बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना). 

उदाहरण

उपमा अलंकार: "नील गगन सा शांत". यहाँ नीले गगन की तुलना किसी शांत चीज़ से की गई है, जहाँ 'सा' शब्द समानता दर्शा रहा है. 

अतिशयोक्ति अलंकार: "हनुमान की पूंछ में लग न पाई आग, लंका सगरी जल गई गए निशाचर भाग". इस पंक्ति में हनुमान की पूंछ में आग लगने से पहले ही पूरी लंका के जलने की बात कही गई है, जो बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना है. 


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