HP TGT Arts Commission
2019 का हल प्रश्न पत्र
Part=4
इतिहास के प्रश्न
Fully Explained Questions
PYQ सीरीज
🔴 50. 1931 के दूसरे गोल मेज सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया था ?
(A) अरुणा आसफ अली
(B) सुचेता कृपलानी
(C) सरोजिनी नायडू
(D) कल्पना जोशी
✅ 1931 के दूसरे गोल मेज सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व सरोजिनी नायडू ने किया था, जिन्होंने भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया था, जबकि महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया था।
विस्तृत जानकारी
कौन था? सरोजिनी नायडू।
सम्मेलन: दूसरा गोल मेज सम्मेलन।
स्थान और समय: यह सम्मेलन लंदन में 1931 में आयोजित किया गया था।
भूमिका: उन्हें भारतीय महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए चुना गया था।
सम्मेलन का उद्देश्य: इस सम्मेलन में भारत के लिए संवैधानिक सुधारों पर चर्चा हुई थी।
अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति: महात्मा गांधी भी इस सम्मेलन में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने गए थे।
🔴 51. बिन्दुसार ने अशोक को निम्न विद्रोह के दमन के लिए भेजा था
(A) स्वर्णगिरि
(C) उज्जैन
(B) तक्षशिला
(D) तोसाली
✅ बिन्दुसार ने अशोक को तक्षशिला में विद्रोह के दमन के लिए भेजा था, जहाँ अशोक एक राजकुमार के रूप में भेजा गया और उन्होंने इस विद्रोह को सफलतापूर्वक शांत किया। इस घटना का उल्लेख बौद्ध ग्रंथ 'दिव्यावदान' में किया गया है, जिसमें बताया गया है कि तक्षशिला के लोगों ने दुष्ट अधिकारियों के कारण विद्रोह किया था, जिसे बिंदुसार दबा नहीं सके थे और इसलिए उन्होंने अपने पुत्र अशोक को इस कार्य के लिए भेजा।
विस्तृत जानकारी
स्थान: तक्षशिला, जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है।
कारण: तक्षशिला के लोगों ने दुष्ट अधिकारियों के कुकर्मों से तंग आकर विद्रोह कर दिया था।
बिन्दुसार की भूमिका: उन्होंने अपने पुत्र अशोक को विद्रोह का दमन करने के लिए भेजा था।
अशोक की भूमिका: एक राजकुमार के रूप में, अशोक ने बिना किसी रक्तपात के विद्रोह को दबाया और तक्षशिला में व्यवस्था बहाल की।
ऐतिहासिक स्रोत: इस घटना की जानकारी मुख्य रूप से बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान से मिलती है।
🔴 52. हड़प्पावासी वे प्राचीनतम् लोग थे जिन्होंने उत्पादन किया था
(A) जौ का
(B) मोहरों का
(C) कांसे के उपकरणों का
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ इस प्रश्न का सही उत्तर है: (A) जौ का।विवरणहड़प्पा सभ्यता के लोग प्राचीनतम लोग थे जिन्होंने सबसे पहले जौ (Barley) का उत्पादन किया था। उनके द्वारा गेहूं और अन्य कई अनाज की खेती भी होती थी, लेकिन जौ उन प्रमुख फसलों में से थी जिनका उत्पादन सबसे पहले उन्होंने किया। कपास का उत्पादन भी महत्वपूर्ण था, परंतु पूछे गए विकल्पों में "जौ" का उत्पादन ही प्रमुखता से आता है
🔴 53. मोतीलाल नेहरू और सी.आर. दास संस्थापक सदस्य थे
(A) भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के
(B) फॉरवर्ड ब्लॉक के
(C) समाजवादी स्वराजवादी पार्टी के
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ इस प्रश्न का सही उत्तर है: (C) समाजवादी स्वराजवादी पार्टी के।विवरणमोतीलाल नेहरू और सी.आर. दास ने 1923 में स्वराज पार्टी की स्थापना की थी, जिसे 'समाजवादी स्वराजवादी पार्टी' भी कहा जाता है। वे न तो भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी और न ही फॉरवर्ड ब्लॉक के संस्थापक सदस्य थे �����।इसलिए सही विकल्प है:
(C) समाजवादी स्वराजवादी पार्टी के.
🔴 54. दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी से निम्न में से किसने मुलाकात की थी ?
(A) जी.के. गोखले
(B) जे.एल. नेहरू
(C) बी.जी. तिलक
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी से गोपाल कृष्ण गोखले ने मुलाकात की थी। गोखले गांधीजी के राजनीतिक गुरु थे और उन्होंने 1912 में गांधीजी से दक्षिण अफ्रीका में मुलाकात की थी, जिससे गांधीजी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया।
🔴 55. साइमन कमीशन का गठन किसके पुनरीक्षण के लिए किया गया था?
(A) भारत में विधायिका
(B) वायसराय की स्थिति
(C) आगे सुधार के लिए भारत की उपयुक्तता
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ साइमन कमीशन का गठन भारत सरकार अधिनियम 1919 के कामकाज की समीक्षा करने और भारत में संवैधानिक सुधारों के लिए सुझाव देने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में विधायिका (Indian Legislature) के पुनरीक्षण के लिए था।इसलिए सही उत्तर है:
(A) भारत में विधायिका
🔴 56. बाबर का जन्म किस वर्ष हुआ था?
(A) 1476
(B) 1483
(C) 1491
(D) 1494
✅ बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 को हुआ था, इसलिए सही उत्तर है (B) 1483. वह उज़्बेकिस्तान के फ़रगना घाटी में अंदिजान नामक शहर में पैदा हुए थे.
विस्तृत जानकारी
जन्म तिथि: 14 फरवरी, 1483
जन्म स्थान: अंदिजान, फ़रगना घाटी (जो आज उज़्बेकिस्तान में है)
पिता: उमर शेख मिर्ज़ा
माँ: कुतलुग निगार खानम
🔴 57. बौद्ध धर्म को अंगीकार करने के लिए अशोक को किस भिक्षुक ने प्रभावित किया था?
(A) विष्णु गुप्त
(B) ब्रह्म गुप्त
(C) बृहद्रथ
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ अशोक को बौद्ध धर्म अपनाने के लिए बौद्ध भिक्षु उपगुप्त ने प्रभावित किया था। विकल्प (A), (B), और (C) गलत हैं क्योंकि वे गलत व्यक्ति हैं, और सही उत्तर डी में नहीं बल्कि विकल्प में दिए गए नामों में से एक में है।
उपगुप्त: ये मौर्य सम्राट अशोक के आध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं और इन्होंने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। उपगुप्त की शिक्षाओं और मार्गदर्शन का अशोक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिससे उन्होंने अहिंसा और कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
🔴 58. स्वामी दयानंद सरस्वती का मूल नाम था
(A) अभि शंकर
(B) गौरी शंकर
(C) दया शंकर
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ स्वामी दयानंद सरस्वती का मूल नाम मूल शंकर था। उनका जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात के टंकारा नामक गाँव में हुआ था, और धनु राशि और मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण उन्हें 'मूलशंकर' नाम दिया गया था।
बचपन का नाम: स्वामी दयानंद सरस्वती का बचपन का नाम मूलशंकर था।
जन्म: 12 फरवरी 1824।
स्थान: गुजरात का टंकारा गाँव।
नामकरण का कारण: उनका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था, जिसके कारण उनके माता-पिता ने उनका नाम मूलशंकर रखा।
🔴 59. नीति (NITI) आयोग है एक
(A) संवैधानिक निकाय
(B) सांविधिक निकाय
(C) सलाहकारी निकाय
(D) इनमें से कोई नहीं
नीति (NITI) आयोग एक सलाहकारी निकाय है, क्योंकि न तो इसका उल्लेख संविधान में है और न ही इसे संसद के किसी कानून द्वारा स्थापित किया गया है; इसे कैबिनेट प्रस्ताव के माध्यम से बनाया गया है.
नीति आयोग का स्वरूप:
संवैधानिक निकाय नहीं: नीति आयोग का नाम भारत के संविधान में कहीं नहीं है, इसलिए यह संवैधानिक संस्था नहीं है.
सांविधिक निकाय नहीं: नीति आयोग की स्थापना संसद द्वारा पारित किसी विशेष कानून के तहत नहीं हुई है, इसलिए यह सांविधिक निकाय भी नहीं है.
सलाहकारी निकाय: यह भारत सरकार का एक नीतिगत 'थिंक टैंक' है जो सरकार को दिशात्मक और नीतिगत इनपुट प्रदान करता है.
कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा स्थापित: 1 जनवरी, 2015 को, इसे प्रधानमंत्री के कैबिनेट प्रस्ताव के माध्यम से योजना आयोग के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया गया था, जो कि कार्यकारी आदेश के तहत आता है.
इसलिए, सही विकल्प (C) सलाहकारी निकाय है.
नीति आयोग भारत सरकार का एक थिंक टैंक और सार्वजनिक नीति नोडल एजेंसी है, जिसे नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) के नाम से जाना जाता है. यह 1 जनवरी, 2015 को योजना आयोग का स्थान लेने के बाद बनाया गया था, जिसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और आर्थिक विकास के लिए रणनीतिक और तकनीकी सलाह प्रदान करना है. नीति आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण अपनाता है और मध्यम एवं दीर्घकालिक नीतियों को तैयार करता है.
मुख्य बिंदु
नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया: नीति आयोग का पूरा नाम नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया है.
स्थापना: इसे 1 जनवरी, 2015 को पूर्ववर्ती योजना आयोग की जगह पर स्थापित किया गया था.
कार्य:
यह भारत सरकार का शीर्ष सार्वजनिक नीति थिंक टैंक है, जो नीतिगत इनपुट और सलाह प्रदान करता है.
यह आर्थिक विकास को उत्प्रेरित करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच भागीदारी सुनिश्चित करता है.
यह मध्यम और दीर्घकालिक नीतियों को डिजाइन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
सहकारी संघवाद: यह केंद्र और राज्यों के बीच एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, जिससे नीचे से ऊपर की ओर नीति निर्माण की प्रक्रिया चलती है.
अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष होते हैं.
मुख्यालय: इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.
🔴 60. भारत के संविधान में कितने प्रकार के आपातकाल का प्रावधान है?
(A) 3
(B) 4
(C) 5
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ भारत के संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल का प्रावधान है: राष्ट्रीय आपातकाल, राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन), और वित्तीय आपातकाल।
ये तीन प्रकार के आपातकाल भारतीय संविधान के भाग XVIII में अनुच्छेद 352, 356 और 360 के तहत दिए गए हैं:
राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352): यह युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में लागू किया जाता है।
राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन - अनुच्छेद 356): यह तब लगाया जाता है जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता हो जाती है।
वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360): यह तब घोषित किया जाता है जब भारत की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा हो।
अतः, सही विकल्प (A) 3 है।
भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, जो 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था और इसे डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा ने तैयार किया था। यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है और सरकार की संसदीय प्रणाली की स्थापना करता है, जिसमें नागरिकों के मौलिक अधिकार भी शामिल हैं।
संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
लिखित और व्यापक: भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जो सरकार के ढांचे, शक्तियों और कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
प्रस्तावना: यह संविधान की प्रस्तावना से शुरू होता है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्शों को दर्शाती है।
मौलिक अधिकार: नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धर्म की स्वतंत्रता, और सांस्कृतिक व शैक्षिक अधिकार जैसे मौलिक अधिकार प्रदान करता है।
संसदीय शासन प्रणाली: भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है, जिसमें राष्ट्रपति केंद्र की कार्यपालिका का प्रमुख होता है, और राष्ट्रपति की सहायता के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्री परिषद होती है।
संघीय संरचना: संविधान की संघीय संरचना केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करती है।
संशोधनों की प्रक्रिया: समय के साथ संविधान में संशोधन भी किए गए हैं, जिससे यह वर्तमान समय के अनुरूप बना रहे।
संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु
अपनाया जाना: 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया।
लागू होना: 26 जनवरी, 1950 से भारत में लागू हुआ, जिसे भारत के गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
तैयार करने की प्रक्रिया: संविधान को तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे थे।
मूल संविधान: मूल संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं, जबकि संशोधित संविधान में 25 भाग, 470 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं।
🔴 61. भारत का उच्चतम न्यायालय संघ न्यायालय के रूप में कार्य करता है जब यह देखता है
(A) सिविल प्रकरणों को
(B) चुनाव याचिकाओं को
(C) निम्नतर न्यायालय से अपीलों को
(D) अन्तर-राज्य विवादों को
✅ भारत का उच्चतम न्यायालय अन्तर-राज्यीय विवादों की सुनवाई करते समय एक संघ न्यायालय के रूप में कार्य करता है, क्योंकि यह केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों के बीच के विवादों का निपटारा करता है, जो इसके मूल क्षेत्राधिकार का हिस्सा है।
संघीय न्यायालय के रूप में कार्य: सर्वोच्च न्यायालय संघ (केंद्र) और राज्यों या राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा करता है, जिससे यह एक संघीय न्यायालय की भूमिका निभाता है।
अन्तर-राज्य विवाद: इसमें केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद, या दो या दो से अधिक राज्यों के बीच विवाद शामिल हो सकते हैं।
विशेष मूल क्षेत्राधिकार: इन संघीय विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय का विशेष मूल क्षेत्राधिकार होता है, जिसका अर्थ है कि इन मामलों की सुनवाई सीधे सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है।
🔸
यह रहा भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) के बारे में विस्तृत और सरल विवरण —
🏛️ भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)
🔹 स्थापना (Establishment)
स्थापना तिथि: 28 जनवरी 1950
संविधान का अनुच्छेद: अनुच्छेद 124 से 147 तक उच्चतम न्यायालय से संबंधित हैं।
स्थान: नई दिल्ली (Tilak Marg)
स्थापना का उद्देश्य: पूरे देश में कानून और संविधान की एकरूपता बनाए रखना, और न्याय का अंतिम संरक्षण प्रदान करना।
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🔹 संरचना (Composition)
उच्चतम न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India - CJI) और अधिकतम 33 अन्य न्यायाधीश हो सकते हैं।
👉 कुल न्यायाधीशों की संख्या = 34 (1 मुख्य + 33 अन्य)
न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
न्यायाधीशों की नियुक्ति में कोलेजियम प्रणाली (Collegium System) लागू है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों का पैनल अनुशंसा करता है।
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🔹 योग्यता (Qualifications)
उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति को —
1. भारत का नागरिक होना चाहिए।
2. या तो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश कम से कम 5 वर्ष तक रहा हो,
या
3. किसी उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता (advocate) रहा हो,
या
4. राष्ट्रपति की दृष्टि में विशिष्ट विधि विशेषज्ञ (distinguished jurist) होना चाहिए।
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🔹 कार्यकाल (Tenure)
न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद पर रह सकते हैं।
वे स्वेच्छा से इस्तीफा दे सकते हैं या संसद द्वारा महाभियोग (impeachment) के माध्यम से हटाए जा सकते हैं।
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🔹 मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India)
मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
परंपरा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश बनाया जाता है।
पहले मुख्य न्यायाधीश थे — सर हरिलाल जे. कानिया (H. J. Kania)
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🔹 अधिकार एवं शक्तियाँ (Powers and Functions)
1. मौलिक अधिकारों का संरक्षण (Guardian of Fundamental Rights)
नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय को विशेष अधिकार प्राप्त हैं।
संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
इसे कहा जाता है — संवैधानिक उपचार का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)।
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2. न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review)
सुप्रीम कोर्ट संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
यह संविधान की सर्वोच्चता (Supremacy of the Constitution) को सुनिश्चित करता है।
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3. अपील न्यायालय (Court of Appeal)
यह देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है।
उच्च न्यायालयों के फैसलों के विरुद्ध अपील यहाँ की जाती है।
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4. परामर्शी अधिकार (Advisory Jurisdiction)
अनुच्छेद 143 के तहत, राष्ट्रपति किसी विधिक या संवैधानिक प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट से परामर्श मांग सकते हैं।
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5. मूल अधिकारिता (Original Jurisdiction)
राज्यों के बीच विवाद या केंद्र और राज्य के बीच विवाद में सीधे सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जा सकता है।
जैसे — जल विवाद, सीमाविवाद, आदि।
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6. विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition – SLP)
अनुच्छेद 136 के तहत सुप्रीम कोर्ट किसी भी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय पर विशेष अनुमति से अपील स्वीकार कर सकता है।
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🔹 महत्वपूर्ण भूमिका
यह भारत के संविधान का संरक्षक (Guardian of the Constitution) और
न्यायपालिका का सर्वोच्च निकाय (Highest Judicial Authority) है।
इसका निर्णय संपूर्ण देश पर बाध्यकारी (binding) होता है।
🔹 महत्वपूर्ण तथ्य
बिंदु विवरण
स्थापना 28 जनवरी 1950
प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर हरिलाल जे. कानिया
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (2025 तक) [ताज़ा जानकारी मैं अपडेट कर दूँ, यदि चाहें]
न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 34
सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष
संविधान के अनुच्छेद 124 से 147
स्थान नई दिल्ली
🔴 62. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार राज्य परिषद का गठन या विघटन किया जा सकता है?
(A) अनुच्छेद 167
(C) अनुच्छेद 169
(B) अनुच्छेद 168
(D) अनुच्छेद 170
✅ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार, राज्य विधान परिषद का गठन या विघटन किया जा सकता है। यह अधिकार संसद को दिया गया है, बशर्ते कि राज्य की विधान सभा उस प्रभाव के लिए एक प्रस्ताव को विशेष बहुमत से पारित करे।
विस्तार से समझें:
अनुच्छेद 169: यह राज्यों में विधान परिषदों के निर्माण या उन्मूलन का प्रावधान करता है।
प्रक्रिया:
सबसे पहले, राज्य की विधान सभा को विधान परिषद के गठन या उसे समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करना होगा।
यह प्रस्ताव विधानसभा की कुल सदस्यता के बहुमत से और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए।
प्रस्ताव पारित होने के बाद, संसद इस प्रस्ताव को प्रभावी करने के लिए एक कानून बना सकती है, जिससे विधान परिषद का गठन या उन्मूलन हो सकता है।
संसद की भूमिका: राज्य विधान सभा के प्रस्ताव के आधार पर, संसद उस राज्य में विधान परिषद के निर्माण या उन्मूलन के लिए कानून बना सकती है।
🔴 63. भारतीय संसद की सबसे बड़ी समिति है।
(A) आकलन समिति
(B) शासकीय प्रत्याभूति समिति के
(C) विशेषाधिकार समिति
(D) लोक लेखा समिति
✅ भारतीय संसद की सबसे बड़ी समिति प्राक्कलन समिति है, जिसमें 30 सदस्य होते हैं, जो सभी लोकसभा से चुने जाते हैं. यह समिति सरकारी व्यय और अर्थव्यवस्था में मितव्ययिता तथा दक्षता पर रिपोर्ट प्रस्तुत करती है.
सदस्य संख्या: 30 सदस्य
सदस्य उत्पत्ति: सभी सदस्य लोकसभा से होते हैं.
कार्य: विभिन्न विभागों के व्यय अनुमानों की जांच करना और प्रशासन में सुधार के लिए सुझाव देना.
यह समिति व्यय में मितव्ययिता और दक्षता पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का प्रयास करती है.
🔴 64. लोक सभा के कार्य व्यवहार संचालन के लिए गणपूर्ति (कोरम) क्या है?
(A) 1/6 भाग
(C) 1/10 भाग
(B) 1/8 भाग
(D) इनमें से कोई नहीं
लोकसभा के कार्य व्यवहार संचालन के लिए गणपूर्ति (कोरम) सदन के कुल सदस्यों की संख्या का दसवाँ भाग (1/10वां) होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 100(3) के अनुसार, लोकसभा की बैठक आयोजित करने के लिए कम से कम इतने सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होती है, अन्यथा अध्यक्ष सदन को स्थगित कर सकते हैं।
नियम: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 100(3) स्पष्ट करता है कि लोकसभा और राज्यसभा सहित प्रत्येक सदन की बैठक के लिए गणपूर्ति, सदन के कुल सदस्यों की संख्या का दसवां भाग होती है।
उद्देश्य: कोरम यह सुनिश्चित करता है कि सदन के कामकाज के लिए पर्याप्त सदस्य उपस्थित हों, ताकि किसी भी निर्णय को बहुमत के आधार पर ही लिया जा सके और अल्पसंख्यक द्वारा निर्णय लेने से रोका जा सके।
कार्यवाही स्थगित करना: यदि कोरम पूरा नहीं होता है, यानी आवश्यक सदस्य संख्या उपस्थित नहीं होती है, तो सदन के अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित या स्थगित रखने का अधिकार होता है जब तक कि गणपूर्ति पूरी न हो जाए।
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