भारतीय काव्यशास्त्र || भाग -1
भारतीय
काव्यशास्त्र
1. “शब्दार्थों सहित काव्यम्”। काव्य लक्षण के संबंध में प्रस्तुत कथन किसका है?
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भामह
2. “वाक्यं रसात्मकं काव्यं”। किसका कथन है?
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मम्मट
3. “रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्” – किसने कहा?
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विश्वनाथ
4. “तददोषौशब्दार्थों सगुणावनलंकृति पुनः क्वापि”।
काव्य लक्षण के संबंध में प्रस्तुत कथन किसका है?
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पंडितराज जगन्नाथ
5. किसने मृदुललित पदावली, गूढशब्दार्थहीनता, सर्वसुगमता, युक्तिमत्ता, नृत्योपयोग-योग्यता, बहुवृतरसमार्गता, एवं संधियुक्तता के
रूप में काव्य के सात तत्त्वों का निरूपण किया है?
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भरत मुनि
6. वास्तविक काव्यलक्षण का प्रारंभ _______से होता है, जिन्होंने शब्द और अर्थ के सहभाव को काव्य की संज्ञा दी है। रिक्त स्थान में आएगा?
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भामह
7. किसके अनुसार इष्ट अर्थ को व्यक्त करने वाली पदावली
काव्य है (शरीरं तावदिष्टार्थव्यवच्छिन्ना पदावली)?
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आचार्य दण्डी
8. “रीतिरात्मा काव्यस्य”। किसका कथन है?
- आचार्य वामन
9. “ननु शब्दाथों काव्यम्” सूत्र किसका है?
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रुद्रटं
10. “वक्रोत्ति; काव्यजीवितम्” कथन किसका है?
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कुंतक
11. 'जदपि सुजाति सुलक्षणी, सुबरन सरस सुवृत्त।
भूषन बिनु न विराजई कविता वनिता मित्त ।।' - पंक्तियाँ किस
कवि की हैं?
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आचार्य केशवदास
12. "सगुनालंकार सहित दोष रहित जो होई। शब्द अर्थ
ताँकी कवित कहत बिबुध सब कोई।।" - पंक्तियाँ किस कवि की हैं?
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चिंतामणि
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