संत काव्य धारा // भक्तिकाल 


👉 संत पीपा रामानंद के शिष्य थे। ये खीची वंश के राजपूत थे।


👉 संत दूलह सतनामी संप्रदाय के थे।


👉 निर्वान ग्यान साध संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है।


👉  यारी साहब निर्गुण मार्गी संत थे।


👉 संत धन्ना का जन्म 1415 ई. है।


👉  संत वीरमान की उपदेशपरक रचनाएँ ‘बानी’ शीर्षक से संकलित हैं।

👉 संत काव्यधारा का दार्शनिक-सांस्कृतिक आधार- उपनिषद, शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन, नाथ पंथ, इस्लाम, सूफी दर्शन, बौध दर्शन है।


👉 कबीर, दादू, मलूकदास आदि संत कवि पूर्णतया अद्वैतवादी हैं।


👉 कबीर, रैदास, मूलकदास आदि संत कवियों की रचनाओं में सगुण तत्व के भी दर्शन होते हैं।


👉 योग साधना से प्रभावित कवि- कबीर, सुंदरदास, हरिदास निरंजनी।


👉 योग साधना से अप्रभावित कवि- दादू, नानक, रैदास, जम्भनाथ, सींगा, भीषण, रज्जब, बावरी साहब, मूलकदास, बाबा लाल आदि।



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