काव्यशास्त्र

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काव्यशास्त्र


1. आनन्दवर्धन, मम्मट, विश्वनाथ ने गुणों का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं माना है। इसे रसाश्रित स्वीकार किया है।


2. हिंदी के मूर्धन्य विद्वान और हिंदी साहित्य की मुकम्मल इतिहास देने वाले आचार्य शुक्ल ने गुण को रसाश्रित माना है।

 3. डॉ श्यामसुंदर दास ने गुणों को 'शैली' के अंतर्गत रखा है।


4. हिंदी के रीतिकालीन आचार्यों ने गुणों की संख्या तीन स्वीकार की है - ओज गुण, प्रसाद गुण और माधुर्य गुण


5. आचार्य देव ने अपने ग्रन्थ 'शब्द रसायन' के सप्तम प्रकाश में 12 काव्यगुण माने हैं। 


 - वामन ने प्रसाद गुण को ओज गुण का विरोधी कहा है।


6.  दंडी के अनुसार समास युक्त पदों की बहुलता ओज गुण का परिचायक है।


7. काव्य गुण का अर्थ - 'दोषाभाव, शोभाकारी या आकर्षक धर्म।


8.  गुण सम्प्रदाय को आचार्य वामन ने रीति सम्प्रदाय कहा है। आचार्य वामन गुण के प्रतिष्ठपक हैं।

 

9.  'शौर्यादिवत' गुणों को और 'हारादिवत' अलंकारों को आचार्य मम्मट ने कहा।


10. भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में गुणों की संख्या 10 मानी है। क्रमशः माधुर्य प्रसाद ओज कांति समाधि श्लेष सौकुमार्य अर्थव्यक्ति उदारता समता।


11.  आचार्य दण्डी ने गुणों की संख्या 10 और वामन ने 20 मानी है।


12. आचार्य कुंतक ने अपने ग्रन्थ वक्रोक्ति जीवितम में 2 काव्य गुण (औचित्य और सौभाग्य) माने हैं।


13. आनन्दवर्धन ने चित्त की तीन अवस्थाओं (द्रुति दीप्ति व्यापकत्व) के आधार पर काव्य गुणों की संख्या 3 मानी है।


एग्जाम विवेचना 


14 "उद्दात्तता" काव्य का मूल स्रोत्र है - लोंजाइनस


15. त्रासदी का लक्ष्य है - भावों का विरेचन एवम यथार्थ का ज्ञान


16. "कला आशयजन्य नहीं है" - अरस्तू


17. चौपाई में 16 मात्राएं, दोहा और सोरठा में 24 मात्राएं, उल्लाला में 28 मात्राएं एवम हरिगीतिका में भी 28 मात्राएं होती हैं।


18. 'दण्डक' किसे कहते हैं - वर्ण वृत्त में 26 वर्ण से अधिक वाले दण्डक कहलाते हैं।


19. "स्वछंद छंद में 'आर्ट ऑफ म्यूजिक' नहीं मिल सकता, वहां 'आर्ट ऑफ रीडिंग' है, वह स्वर प्रधान नहीं व्यंजन प्रधान है" - निराला


20. मुक्त छंद की कल्पना हिंदी में विधिवत किस युग में प्रारम्भ हुई - छायावाद


21. 'लीव्स ऑफ द ग्रास' पुस्तक किसकी है - वाल्ट व्हिटमैन


22. छंद में लय क्या है - लय एक संयत व्यवस्था है जो स्वर के आरोह-अवरोह से उत्पन्न होती है।


23. छंदशास्त्र को अन्य किस नाम से जानते हैं - पिंगलशास्त्र


24.  दोषों के लक्षणों का विवेचन सर्वप्रथम किसने किया - वामन


25. "मुख्यार्थ का जिससे अपकर्ष हो वह दोष है" - मम्मट


26.  "गुण काव्य की संपत्ति अर्थात सौंदर्य विधायक तत्व और दोष उसकी विपत्त्ति अर्थात सौंदर्य विघातक तत्व है" - दण्डी


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